शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी का नेटवर्क लगातार विस्तारित होता जा रहा है। पिछले करीब दस वर्षों में NDPS के तहत दर्ज मामलों की संख्या 15 हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद नशा माफिया अपनी पैठ बढ़ाता दिखाई दे रहा है।
हिमाचल में बढ़ रही नशा तस्करी
चिंताजनक बात यह है कि राज्य की जेलों में बंद कुल कैदियों में से 42.51 प्रतिशत आरोपी सिर्फ नशा तस्करी से जुड़े मामलों में अंदर हैं। पुलिस ने न केवल भारी मात्रा में नशे की खेप पकड़ी है, बल्कि इस अवैध कारोबार से जुड़े आरोपियों की करोड़ों की संपत्ति को भी जब्त किया है।
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साढ़े 17 करोड़ से अधिक की संपत्ति फ्रीज
इस साल ही नशा तस्करों की 17 करोड़ 63 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति फ्रीज की गई है- जो बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। अब राज्य सरकार भी सक्रिय हुई है और पुलिस विभाग के सहयोग से चिट्टा एवं अन्य नशे के खिलाफ एक विशेष राज्यव्यापी अभियान शुरू करने जा रही है।
NDPS मामलों का विस्तृत रिकॉर्ड
बीते वर्षों में पुलिस ने जिस मात्रा में नशा पकड़ा है, वह यह दर्शाता है कि हिमाचल न सिर्फ नशे का उपभोक्ता बाजार बन रहा है बल्कि एक बड़े ट्रांजिट रूट में भी तब्दील हो रहा है। नीचे वर्षवार विवरण दिया गया है-
2015
- कुल मामले: 622
पकड़ी गई खेप: - 283.434 किलो चरस
- 5.22 किलो अफीम
- 835 ग्राम गांजा
- 157 ग्राम स्मैक
- 387 ग्राम हेरोइन
- 1,88,463 प्रतिबंधित गोलियां
- 88,788 कैप्सूल
- 3,280 प्रतिबंधित सिरप
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2016
- कुल मामले: 929
पकड़ी गई खेप: - 377.535 किलो चरस
- 26.935 किलो अफीम
- 209 ग्राम स्मैक
- 90 किलो गांजा
- 634 ग्राम हेरोइन
- 56,110 गोलियां
- 77,243 कैप्सूल
- 3,029 सिरप
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2017
- कुल मामले: 1010
पकड़ी गई खेप: - 306.925 किलो चरस
- 8.378 किलो अफीम
- 148 किलो गांजा
- 250 ग्राम स्मैक
- 3 किलो 417 ग्राम हेरोइन
- 1,34,520 गोलियां
- 1,05,897 कैप्सूल
- 1,658 सिरप
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2018
- कुल मामले: 1341
पकड़ी गई खेप: - 470.600 किलो चरस
- 7 किलो अफीम
- 315 ग्राम स्मैक
- 7 किलो 707 ग्राम हेरोइन
- 21 किलो गांजा
- 55,561 गोलियां
- 88,166 कैप्सूल
- 1,143 सिरप
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2019
- कुल मामले: 1439
पकड़ी गई खेप: - 327.209 किलो चरस
- 17.568 किलो अफीम
- 150 ग्राम स्मैक
- 7 किलो 960 ग्राम हेरोइन
- 1,02,956 गोलियां
- 19,724 कैप्सूल
- 9,848 सिरप
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2020
- कुल मामले: 1538
पकड़ी गई खेप: - 351 किलो चरस
- 25 किलो से अधिक अफीम
- 47 ग्राम स्मैक
- 6 किलो 751 ग्राम हेरोइन
- 46,370 गोलियां
- 1,18,145 कैप्सूल
- 940 सिरप
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2021
- कुल मामले: 1537
पकड़ी गई खेप: - 593.341 किलो चरस
- 40.808 किलो अफीम
- 61 ग्राम स्मैक
- 14 किलो 907 ग्राम हेरोइन
- 3,068 गोलियां
- 13,976 कैप्सूल
- 265 सिरप
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2022
- कुल मामले: 1537
पकड़ी गई खेप: - 358.601 किलो चरस
- 32 किलो अफीम
- 60 ग्राम स्मैक
- 11 किलो 519 ग्राम हेरोइन
- 21,768 गोलियां
- 9,968 कैप्सूल
- 807 सिरप
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2023
- कुल मामले: 2147
पकड़ी गई खेप: - 347 किलो चरस
- 34.558 किलो अफीम
- 133 ग्राम स्मैक
- 14 किलो 705 ग्राम हेरोइन
- 53,611 गोलियां
- 43,702 कैप्सूल
- 1,635 सिरप
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2024
- कुल मामले: 1714
पकड़ी गई खेप: - 371 किलो चरस
- 36 किलो अफीम
- 6 ग्राम स्मैक
- 11 किलो से अधिक हेरोइन
- 35,682 गोलियां
- 18,991 कैप्सूल
- 48 सिरप
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2025 (सितंबर तक)
- कुल मामले: 1618
पकड़ी गई खेप: - 275 किलो से अधिक चरस
- 20 किलो से अधिक अफीम
- 10 किलो 9265 ग्राम हेरोइन
- 79,135 गोलियां
- 20,450 कैप्सूल
- 80 सिरप
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नशे का बढ़ता खतरा और चुनौती
इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में नशा तस्करी का नेटवर्क लगातार गहराता जा रहा है। जहां चरस और अफीम की तस्करी लंबे समय से चिंता का विषय है, वहीं हेरोइन (चिट्टा) की बढ़ती मात्रा ने नए खतरे पैदा किए हैं।
नहीं कम हो रहा अवैध कारोबार
पुलिस की निरंतर छापेमारी और नशा तस्करों पर कार्रवाई के बावजूद यह अवैध कारोबार कम होने का नाम नहीं ले रहा। यही कारण है कि सरकार भी अब एक बड़े स्तर की रणनीति के साथ मैदान में उतरने जा रही है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य युवाओं तक पहुंच रहे नशे के सप्लाई चैन को तोड़ना और माफिया पर कानूनी शिकंजा कसना होगा।
