मंडी। हिमाचल प्रदेश को इस बार बरसात के मौसम में हुई बारिश ने तहस-नहस कर दिया है। बरसात का मौसम खत्म होने के बावजूद कई जगहों पर अभी भी सड़कों का नामोनिशान नहीं है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में जब सरकार और प्रशासन मौन दिखाई दिए, तब जनता की उम्मीद बनकर सामने आए ज़िला परिषद सदस्य, भाजपा नेता और समाजसेवी चंद्रमोहन शर्मा।
सुक्खू सरकार ने मूंदी आंखें
सरकाघाट विधानसभा क्षेत्र के थौना वार्ड से जिला परिषद सदस्य शर्मा ने वह काम कर दिखाया जो सुक्खू सरकार महीनों से नहीं करवा सकी थी- अपने खर्चे और जनसहयोग से 30 बंद सड़कों को बहाल करवा दिया।
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बहुत परेशान थे ग्रामीण
इस साल के भारी मानसून ने मंडी ज़िले के अनेक इलाकों की सड़क व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया। कई संपर्क मार्ग भूस्खलन और मलबे से बंद हो गए, जिससे लोगों का जनजीवन ठप पड़ गया था।
जिला परिषद से मांगी मदद
बच्चों को स्कूल जाना मुश्किल हो गया, बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाने में दिक्कत आने लगी, और ग्रामीणों को रोजमर्रा की ज़रूरतों के लिए लंबा पैदल सफर तय करना पड़ रहा था।ग्रामीणों ने विभागों और नेताओं के दरवाजे खटखटाए, लेकिन महीनों तक कोई सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में जब निराशा बढ़ी तो लोगों ने अपने क्षेत्र के प्रतिनिधि चंद्रमोहन शर्मा से गुहार लगाई।
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शर्मा ने खुद उठाया जि
चंद्रमोहन शर्मा ने बिना समय गंम्मावाए स्थानीय मशीन ऑपरेटरों से बात की और जनसहयोग के साथ सड़क बहाली का बीड़ा उठाया। कई ऑपरेटरों ने भी बिना किसी सरकारी भुगतान के केवल तेल खर्च पर मशीनें चलाकर कार्य में सहयोग दिया। देखते ही देखते, जो काम महीनों से रुका हुआ था, वह कुछ ही दिनों में पूरा हो गया।
खलुवाई 30 से ज्यादा सड़कें
इस सामूहिक प्रयास से अब तक 30 से अधिक सड़कों को दोबारा खोला जा चुका है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “बुलडोजर वाला भाई” कहकर संबोधित कर रहे हैं — एक ऐसा उपनाम जो जनता की आभार भावना को बखूबी दर्शाता है।
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जनता के लिए काम करना मेरा धर्म
शर्मा ने कहा मैं अपने क्षेत्र का प्रतिनिधि हूं। जब सरकार और विभाग लोगों की समस्याओं को हल नहीं कर सके, तो मेरा फर्ज़ था कि मैं खुद मैदान में उतरूं। यह जनता का क्षेत्र है, उनकी तकलीफ हमारी जिम्मेदारी है। आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने उन मशीन ऑपरेटरों और सहयोगियों का विशेष धन्यवाद किया जिन्होंने इस अभियान में दिल से हिस्सा लिया और बिना किसी स्वार्थ के काम किया।
राहत की सांस ले रहे हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के बाद से कई सड़कें महीनों तक बंद थीं। खेतों तक पहुंचना, बच्चों को स्कूल भेजना और ज़रूरी सामान लाना तक मुश्किल हो गया था। अब जब सड़कें दोबारा खुल गई हैं तो लोगों ने राहत की सांस ली है। महिलाओं और बुजुर्गों ने भी कहा कि अब उन्हें फिर से जीवन की सामान्य रफ्तार मिल गई है।
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किन-किन सड़कों की हुई बहाली?
इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत गेहरा में गेहरा से कुफ्रू डवरोग, जनीहण मेन रोड से अनुसूचित जनजाति बस्ती कोलनी, गेहरा से सिहरल बटड़ा, जालपा माता मंदिर से लंगस, पोस्ट ऑफिस से पंचायत भवन तक सहित कई संपर्क मार्गों को खोला गया।
कई सड़कों पर आवाजाही शुरू
टिक्कर पंचायत में टिक्कर से सदोह, खील से अपर सदोह, दुर्गापुर से कोठी, जमनगलू से चलगहरी आदि सड़कों को बहाल किया गया। पिंगला, भद्रवाड़, चहलोग, गाहर, गौंटा, समसौह, भरनाल और खलारड्ड पंचायतों में भी बंद पड़े संपर्क मार्गों को खोला गया, जिससे अब लोगों की आवाजाही सुचारू रूप से हो रही है।
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लोगों में बढ़ा भरोसा
इस काम के बाद क्षेत्र के अन्य इलाकों के लोग भी अब अपने बंद पड़े रास्तों को खुलवाने के लिए चंद्रमोहन शर्मा से ही उम्मीद लगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकारी तंत्र असहाय नजर आया, तब शर्मा ने बिना राजनीति किए सिर्फ इंसानियत के नाते राहत पहुंचाई।
शर्मा की इस पहल ने न केवल दर्जनों गांवों को जोड़ा है, बल्कि एक उदाहरण भी पेश किया है कि अगर जनप्रतिनिधि नीयत से काम करें, तो सीमित संसाधनों में भी जनता तक राहत और उम्मीद दोनों पहुंचाई जा सकती हैं।
