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June 1, 2026
पार्टी से निष्कासित देवांश ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत, कांग्रेस-भाजपा प्रत्याशियों की जब्त हो गई जमानत
देवांश चंदेल ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत, 10018 के रिकॉर्ड अंतर से जीता चुनाव
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में संपन्न हुए जिला परिषद और बीडीसी चुनावों के नतीजों ने सूबे की पारंपरिक राजनीति की चूलें हिलाकर रख दी हैं। इन चुनावों में कई ऐसे उम्मीदवार विजयी होकर सामने आए हैं जिन्होंने यह साबित कर दिया कि चुनाव जीतने के लिए किसी राजनीतिक दल का बड़ा नाम या चुनाव चिन्ह ही सब कुछ नहीं होता। अगर उम्मीदवार के पास जनता के प्रति निष्ठा, कर्मठता और अटूट सेवाभाव हो, तो जनता उसे सिर-आंखों पर बिठाती है।
ऐसा ही एक अविश्वसनीय और हैरान कर देने वाला मामला बिलासपुर जिला के झंडूता विकासखंड से सामने आया है। यहां के नतीजों ने न केवल बड़े-बड़े सियासी दिग्गजों को चौंका दिया है, बल्कि राजनीतिक पंडितों को भी अपने समीकरण बदलने पर मजबूर कर दिया है। जहां भाजपा से निष्कासित किए जा चुके देवांश चंदेल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर ऐसा इतिहास रच दिया जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।
जिला परिषद वार्ड नंबर-8 जांगला से चुनाव लड़ रहे देवांश चंदेल किसी बड़े राजनीतिक दल के आधिकारिक उम्मीदवार नहीं थे। भाजपा से निष्कासन के बाद उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में जनता के बीच जाने का फैसला किया। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि बिना किसी बड़े संगठनात्मक समर्थन के चुनाव जीतना आसान नहीं होगा, लेकिन जांगला वार्ड की जनता ने सारे अनुमान गलत साबित कर दिए।
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जिला परिषद चुनाव परिणामों के अनुसार देवांश चंदेल को 11,882 मत प्राप्त हुए। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुरेश कुमार को केवल 1,864 वोट मिले। वहीं अन्य उम्मीदवार अनुप महाजन को 1,376 और जगदेश कुमार नड्डा को मात्र 477 मत प्राप्त हुए।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि देवांश चंदेल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 10,018 मतों के विशाल अंतर से पराजित किया। यह अंतर न केवल बिलासपुर बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के जिला परिषद चुनावों में सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे संभवतः इस चुनाव का सबसे बड़ा विजय अंतर बताया जा रहा है।
जांगला वार्ड के परिणाम ने प्रदेश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को भी बड़ा संदेश दिया है। इस चुनाव परिणाम ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस को जमीन पर ला दिया है। जांगला वार्ड की जनता ने दोनों ही पार्टियों के आधिकारिक और समर्थित उम्मीदवारों को पूरी तरह से नकार दिया।
स्थिति इस कदर खराब रही कि राजनीतिक रसूख का दावा करने वाली भाजपा और सत्ताधारी कांग्रेस दोनों के ही प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। मतदाताओं ने इस चुनाव में पार्टी लाइन से ऊपर उठकर अपना फैसला सुनाया और एक स्वतंत्र उम्मीदवार को ऐतिहासिक जनादेश दे दिया।
परिणाम घोषित होते ही पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बन गया। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का जश्न मनाया, मिठाइयां बांटीं और एक-दूसरे को बधाई दी। बड़ी संख्या में लोगों ने देवांश चंदेल का स्वागत कर अपनी खुशी व्यक्त की। क्षेत्र में दिनभर जीत की चर्चाएं होती रहीं और लोगों ने इसे जनता की ताकत और लोकतंत्र की खूबसूरती का उदाहरण बताया।
इस ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ जीत के बाद नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्य देवांश चंदेल ने भावुक होते हुए जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति या नेता की नहीं है, बल्कि जांगला वार्ड की उस जनता की जीत है जिसने विचारधारा और दलों की दीवारों को तोड़कर मेरी निष्ठा पर भरोसा जताया। जनता ने जो उम्मीदें मुझसे लगाई हैं, उन पर खरा उतरने के लिए मैं दिन-रात पूरी ईमानदारी और कर्मठता से काम करूंगा।