#विविध
June 2, 2026
हिमाचल: दो बहनों का इकलौता भाई था मरीन कमांडो अमित, पत्नी के हवाले छोड़ गया 4 साल का बेटा
जम्मू में 8 आतंकियों को किया था ढेर, राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र से नवाजा था हिमाचल का वीर सपूत
शेयर करें:

देहरा/कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जम्मू-कश्मीर के घने जंगलों में आतंकियों की कमर तोड़ने वाले भारतीय नौसेना के जांबाज मरीन कमांडो और शौर्य चक्र विजेता अमित सिंह राणा (32) की एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई।
कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी क्षेत्र के खुंडियां के तहत लाहड़ू में सोमवार देर रात उनकी कार अनियंत्रित होकर करीब 500 फीट गहरी खाई में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में देवभूमि हिमाचल ने जहां अपना एक वीर सपूत खो दिया] वहीं एक अभागे माता-पिता के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा छिन गया। पुलिस जिला देहरा के एसपी मयंक चौधरी ने इस दुखद घटना की पुष्टि की है।
इस दिल दहला देने वाले हादसे की क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांबाज अमित राणा सोमवार सुबह ही देश सेवा से कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपने घर पहुंचे थे। पूरे परिवार में उनकी आमद से खुशियों का माहौल था] लेकिन किसे पता था कि यह खुशियां चंद घंटों की ही मेहमान हैं। सोमवार देर रात अमित अपने एक दोस्त से मुलाकात करने के बाद वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान रात करीब 11 बजे लाहड़ू के पास एक बेहद खतरनाक और अंधेरे मोड़ पर उनकी कार अचानक अनियंत्रित हो गई और सीधे 500 फीट गहरे अंधकार में समा गई।
हादसे की आवाज सुनकर स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े और भारी मशक्कत के बाद करीब 12 बजे अमित को खाई से बाहर निकाला। उन्हें तुरंत खुंडियां अस्पताल ले जाया गया,
लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थीय डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अमित राणा की इस असामयिक मौत से उनके हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। अमित अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और दो बहनों के इकलौते भाई थे। उनके पिता खुद सेना में सूबेदार के पद पर रहकर देश की सेवा कर चुके हैं।
इस हादसे ने जहां बहनों से उनका रक्षाकवच छीन लिया, वहीं अमित के महज 4 साल के मासूम बेटे के सिर से पिता का साया हमेशा-हमेशा के लिए उठ गया। वीर सपूत की शहादत जैसी इस मौत के बाद उनकी पत्नी और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।
अमित सिंह राणा की बहादुरी की गाथाएं भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हैं। नौसेना के सबसे खतरनाक और विशिष्ट मरीन कमांडो दस्ते 'मार्कोस' में तैनात अमित ने साल 2018 में जम्मू-कश्मीर में ‘ऑपरेशन रक्षक’ के तहत अपनी अदम्य वीरता का परिचय दिया था।
दुर्गम इलाकों और बेहद जोखिम भरे हालातों में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद किया और अलग-अलग मुठभेड़ों में 8 खूंखार आतंकवादियों को ढेर करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उनकी इसी असाधारण बहादुरी और सर्वोच्च सूझबूझ के लिए साल 2021 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया था।
यह भी पढ़ें : अनुराग ठाकुर ने कांगड़ा घाटी ट्रेन को दिखाई हरी झंडी, बोले- PM मोदी ने रेल बजट में किया रिकॉर्ड इजाफा
मंगलवार को अमित राणा के पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर अपने जांबाज साथी को अंतिम विदाई दी। इस मौके पर ज्वालामुखी के विधायक संजय रत्न सहित भारी संख्या में पहुंचे लोगों ने नम आंखों से वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।
इस बीच, हादसे वाली जगह को लेकर स्थानीय जनता में लोक निर्माण विभाग और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस खतरनाक मोड़ पर यह हादसा हुआ, वहां न तो कोई पैरापिट था और न ही क्रैश बैरियर। लोगों ने आरोप लगाया कि अगर विभाग ने इस खतरनाक ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए होते, तो देश के इस अनमोल रत्न और परिवार के इकलौते चिराग को असमय काल का ग्रास बनने से बचाया जा सकता था। स्थानीय जनता ने प्रशासन से तुरंत यहां सुरक्षा दीवार लगाने की मांग की है।