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June 2, 2026
ना शराब बांटी- ना ही बकरा काटा : दो दोस्तों के साथ किया प्रचार और चुनाव जीता हिमाचल का पत्रकार
जयप्रकाश ने बेहद सादगी के साथ चुनाव प्रचार किया
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सिरमौर। पंचायत चुनावों में अक्सर बड़े-बड़े चुनावी प्रबंध, समर्थकों की भीड़, वाहनों के काफिले और धनबल की चर्चाएं सुनने को मिलती हैं। मगर सिरमौर जिले के एक युवा पत्रकार ने इन परंपरागत धारणाओं को चुनौती दी।
उन्होंने ये साबित कर दिया कि अगर जनता का भरोसा साथ हो तो सीमित संसाधनों के साथ भी चुनाव जीता जा सकता है। वार्ड नंबर-4 बढ़ाना से BDC सदस्य चुने गए युवा पत्रकार जयप्रकाश तोमर की जीत आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जयप्रकाश तोमर ने चुनावी मैदान में उतरते समय न तो किसी बड़े प्रचार अभियान का सहारा लिया और न ही भारी-भरकम चुनावी खर्च किया। उन्होंने बेहद सादगी के साथ चुनाव प्रचार शुरू किया।

कुछ पोस्टर तैयार करवाए और अपने दो मित्रों गौरव तथा महेंद्र के साथ गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों से संपर्क साधा। जनसंपर्क के दौरान उनका पूरा जोर विकास, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों पर रहा।
चुनाव प्रचार के दौरान जयप्रकाश तोमर लगातार लोगों से यह अपील करते रहे कि मतदान किसी लालच या अस्थायी लाभ को देखकर नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं के सामने विकास की सोच को प्राथमिकता देने की बात रखी और अपने विजन को साझा किया।
उनका मानना था कि किसी भी क्षेत्र का भविष्य योजनाबद्ध विकास, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदल सकता है। यही संदेश लेकर वे लगातार लोगों के बीच पहुंचे और सीधे संवाद स्थापित किया।
इस बार जिला सिरमौर में कुल छह पत्रकार अलग-अलग क्षेत्रों से चुनावी मैदान में उतरे थे। हालांकि चुनावी नतीजों में जीत का स्वाद केवल जयप्रकाश तोमर ही चख पाए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला भी मतदान से करीब 15 दिन पहले ही लिया था।

कम समय में चुनावी रणनीति तैयार करना, लोगों तक पहुंचना और समर्थन जुटाना आसान नहीं था। मगर उन्होंने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और लगातार जनसंपर्क अभियान जारी रखा।
चुनावी सफर उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रहा। चुनाव के दौरान क्षेत्र में उनके खिलाफ विभिन्न तरह की चर्चाएं और अफवाहें भी फैलाई गईं। गांव और जातीय समीकरणों को लेकर भी माहौल बनाने की कोशिश हुई।
उन्होंने इन विवादों में उलझने के बजाय अपना पूरा ध्यान जनता के बीच रहने और अपने मुद्दों को पहुंचाने पर केंद्रित रखा। उनकी रणनीति साफ थी जितना अधिक संभव हो, लोगों से सीधे मिलना और अपने विचारों को सामने रखना।
जयप्रकाश तोमर पिछले करीब दस वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं, जनहित के मुद्दों और स्थानीय लोगों की आवाज को मंच देने का काम किया। वर्षों की पत्रकारिता ने उन्हें गांव-गांव तक पहचान दिलाई और लोगों के बीच एक भरोसेमंद छवि बनाई।
चुनाव के दौरान यही पहचान उनके लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हुई। लोगों ने उन्हें केवल उम्मीदवार के रूप में नहीं, बल्कि लंबे समय से क्षेत्र की समस्याओं को उठाने वाले व्यक्ति के रूप में देखा।
चुनावी मुकाबले के दौरान संसाधनों की कमी भी उनके सामने एक बड़ी चुनौती रही। कई मतदान केंद्रों पर उनके एजेंट तक मौजूद नहीं थे। नामांकन के समय भी उनके साथ बहुत कम लोग थे।
इसके बावजूद उन्होंने चुनावी संघर्ष जारी रखा और हार मानने के बजाय लगातार मेहनत करते रहे। उनके समर्थकों का कहना है कि यही संघर्ष और जमीनी जुड़ाव आखिर में उनकी जीत की वजह बना।
मतगणना पूरी होने के बाद घोषित परिणामों में जयप्रकाश तोमर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 73 मतों के अंतर से हराकर जीत हासिल की। जैसे ही परिणाम सामने आया, समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
जयप्रकाश तोमर की जीत की खबर फैलते ही गांव के काफी लोग उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़े। लोगों ने काफी जोर-शोर से जयप्रकाश तोमर का स्वागत किया।ढोल-नगाड़ों की गूंज और उत्साह से भरे माहौल ने जीत को यादगार बना दिया। कई स्थानों पर लोगों ने इस जीत को अपनी जीत बताया।
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जयप्रकाश तोमर पांवटा साहिब क्षेत्र के सीमावर्ती गांव कलाथा-किलोड़ के निवासी हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर शिक्षा केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर (गढ़वाल) से प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद उनका चयन ETV भारत में एंकर के रूप में हुआ।
अपने पत्रकारिता करियर में वह दैनिक जागरण, तहलका सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वह ETV भारत में जिला सिरमौर स्टिंगर के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही पत्नी राधा देवी के सहयोग से एक डिजिटल समाचार मंच का संचालन भी कर रहे हैं।