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June 2, 2026
हिमाचल की नई पंचायत सरकार तैयार : इस दिन शपथ लेंगे 3,754 प्रधान और उपप्रधान- तैयारी तेज
आचार संहिता हटते ही विकास कार्यों को मिलेगी नई रफ्तार
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव संपन्न होने के बाद अब नई निर्वाचित व्यवस्थाओं को औपचारिक रूप से कार्यभार सौंपने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। पंचायत चुनावों में जनता का विश्वास हासिल कर चुने गए प्रधान और उपप्रधान जल्द ही पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे।
इसके लिए पंचायती राज विभाग ने राज्य स्तर पर विशेष शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सूत्रों के अनुसार विभाग की ओर से प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया है।
CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू की स्वीकृति और कार्यक्रम के लिए उपयुक्त समय तय होने के बाद शपथ ग्रहण समारोह की तिथि घोषित की जाएगी। इस आयोजन को प्रदेश स्तर पर विशेष महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से हजारों नए जनप्रतिनिधि अपने आधिकारिक दायित्वों की शुरुआत करेंगे।
जानकारी के मुताबिक राजधानी शिमला स्थित ऐतिहासिक पीटरहाफ परिसर में राज्य स्तरीय शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की योजना है। इस समारोह में प्रदेशभर की पंचायतों से निर्वाचित 3754 प्रधान और इतने ही उपप्रधानों को आमंत्रित किया जाएगा।
CM सुक्खू की मौजूदगी में इन प्रतिनिधियों को पंचायत संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों और जनसेवा के संकल्प के साथ शपथ दिलाई जाएगी। सरकार का मानना है कि पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और इनके प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका से गांवों में विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा।
पंचायती राज व्यवस्था के तहत विभिन्न स्तरों के जनप्रतिनिधियों के लिए शपथ ग्रहण की अलग-अलग व्यवस्था निर्धारित की गई है। जिला परिषद सदस्यों को संबंधित जिलों के उपायुक्त शपथ दिलाएंगे। वहीं, पंचायत समिति सदस्यों को DC द्वारा अधिकृत अतिरिक्त जिला उपायुक्त अथवा उपमंडलाधिकारी शपथ ग्रहण करवाएंगे।
इसके अलावा पंचायतों के वार्ड सदस्यों को संबंधित पंचायत प्रधान द्वारा शपथ दिलाई जाएगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद सभी निर्वाचित प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों और जनहित से जुड़े मामलों पर औपचारिक रूप से काम शुरू कर सकेंगे।
दूसरी ओर पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनावों के संपन्न होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरे प्रदेश में लागू आदर्श चुनाव आचार संहिता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।
आयोग की अधिसूचना जारी होते ही पिछले करीब डेढ़ महीने से विभिन्न विभागों और प्रशासनिक गतिविधियों पर लगी चुनावी पाबंदियां हट गई हैं। आचार संहिता लागू होने के कारण कई विकास परियोजनाएं, सरकारी फैसले और प्रशासनिक प्रक्रियाएं रुकी हुई थीं। अब इन सभी कार्यों को फिर से गति मिलने की उम्मीद है।
आचार संहिता हटने के बाद प्रदेश सरकार और विभिन्न विभाग अब लंबित योजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुट गए हैं। सड़क निर्माण, पेयजल योजनाएं, बिजली परियोजनाएं, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्ताव अब आगे बढ़ सकेंगे।
इसके अलावा विभागों में लंबित नियुक्तियों, नई भर्तियों, स्थानांतरणों और प्रशासनिक मंजूरियों की प्रक्रिया भी दोबारा शुरू होने की संभावना है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दे सकती है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल कुमार खाची द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के सभी स्थानीय निकायों में मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा अधिकांश स्थानों पर चुनाव परिणाम घोषित किए जा चुके हैं। ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों और संबंधित अधिनियमों के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए आदर्श चुनाव आचार संहिता को तत्काल प्रभाव से वापस लिया गया है।
गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने अप्रैल माह में पंचायतों, नगर निगमों और अन्य शहरी निकायों के चुनावों को देखते हुए पूरे प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू की थी। इसके चलते नई योजनाओं की घोषणा, टेंडर प्रक्रिया, सरकारी नियुक्तियां, स्थानांतरण और कई प्रशासनिक निर्णय अस्थायी रूप से रोक दिए गए थे।
चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू होने के साथ ही प्रदेश में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं का नया कार्यकाल प्रारंभ होने जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद है कि नव निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाएंगे।