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June 1, 2026
हिमाचल की नई ग्रामीण सरकार: युवाओं-महिलाओं का दबदबा, अनपढ़ों को भी सौंपी सत्ता की चाबी
अनपढ़ की श्रेणी में हिमाचल की 429 पंचायत प्रतिनिधि
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज चुनावों के संपूर्ण नतीजों ने ग्रामीण राजनीति की एक बिल्कुल नई, प्रगतिशील और बेहद दिलचस्प तस्वीर पेश की है। इस बार देवभूमि के गांवों में बदलाव की एक ऐसी लहर चली है जिसने कई पुराने ढर्रों को तोड़ दिया है। राज्य निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि इस बार गांव की सरकार चुनने में युवाओं, महिलाओं और उच्च शिक्षित उम्मीदवारों ने जहां एक तरफ नया इतिहास रचा है, वहीं मतदाताओं ने कुछ ऐसे फैसले भी लिए हैं जो हैरान करने वाले हैं।
इस बार के चुनावी समर में गांव की सरकार चुनने में युवा वर्ग और आधी आबादी में खासा उत्साह देखने को मिला। कई पंचायतों में तो मुकाबला इतना दिलचस्प रहा कि महज 21 से 25 साल के नौजवानों ने सियासी दिग्गजों को पछाड़कर 'प्रधान' की कुर्सी अपने नाम कर ली। युवा ऊर्जा और नए दृष्टिकोण को ग्रामीणों ने हाथों-हाथ लिया है।
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आंकड़ों के मुताबिक, इस बार के चुनाव में 31 से 50 वर्ष की उम्र वाले उम्मीदवारों का सबसे ज्यादा दबदबा रहा। इस आयु वर्ग के कुल 19,577 प्रत्याशी चुनाव जीतकर सामने आए हैं, जो कुल विजेताओं का लगभग 66 फीसदी है।
हिमाचल प्रदेश देश के सबसे साक्षर राज्यों में शुमार है, और इसकी बानगी इस चुनाव में भी दिखी जहां करीब 80 प्रतिशत से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि कम से कम मैट्रिक (10वीं) या उससे ज्यादा पढ़े-लिखे हैं। लेकिन इसी लोकतंत्र की सबसे खूबसूरत और हैरान करने वाली तस्वीर भी यहीं देखने को मिली।
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कई पंचायतों में ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ से किसी डिग्री को नहीं, बल्कि अनुभव और सादगी को तरजीह दी और अपने गांव की कुर्सी 'अनपढ़' लोगों को सौंप दी। राज्यभर में करीब 429 उम्मीदवार ऐसे भी चुने गए हैं, जो पूरी तरह से अनपढ़ हैं, फिर भी जनता ने उनकी कर्मठता पर भरोसा जताया है।
इस बार के चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि हिमाचल के ग्रामीण विकास की मुख्यधारा में अब महिलाएं सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि लीडर बनकर उभरी हैं। चुनाव प्रचार से लेकर नामांकन तक महिलाओं में अभूतपूर्व उत्साह था।
दिलचस्प बात यह है कि कुल नामांकन दाखिल करने में महिलाओं की हिस्सेदारी भले ही 43.85 फीसदी थी, लेकिन जब नतीजे आए तो बाजी पूरी तरह पलट गई। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का सक्सेस रेट (जीत का प्रतिशत) कहीं ज्यादा रहा। चुनाव आयोग के अनुसार, विजेता उम्मीदवारों में महिलाओं का कुल प्रतिशत 53.89 दर्ज किया गया है। अब प्रदेश की विभिन्न पंचायतों में कुल 15,887 महिलाएं नेतृत्व संभालेंगी।
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निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार कुल 29,483 उम्मीदवार अपनी किस्मत चमकाने में सफल रहे हैं। इन विजेताओं में जहां एक तरफ अमीर और रसूखदार उम्मीदवारों की लंबी फेहरिस्त है, वहीं दूसरी तरफ 2,062 ऐसे उम्मीदवार भी जीतकर आए हैं जो गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करते हैं। पैसे और रसूख के दौर में एक गरीब और आम ग्रामीण का चुनाव जीतना यह साबित करता है कि हिमाचल के गांवों में लोकतंत्र आज भी बेहद मजबूत और खूबसूरत स्थिति में है।