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June 1, 2026

आचार संहिता हटते ही सुक्खू सरकार 8 हजार शिक्षकों का बांध देगी बोरिया बिस्तर! बड़े फेरबदल की तैयारी

सुक्खू सरकार सीबीएसई स्कूलों में करेगी शिक्षकों की तैनाती, बड़े स्तर पर होंगे तबादले

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teacher transfer

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव की लंबी प्रक्रिया अब लगभग संपन्न हो चुकी है। आज कुछ चुनिंदा और अंतिम स्थानों पर जिला परिषद वार्डों की मतगणना का काम चल रहा है, जिसके साथ ही चुनावी सरगर्मियों पर पूरी तरह विराम लग जाएगा। चुनाव संपन्न होने के साथ ही प्रदेश में लागू आदर्श आचार संहिता के हटते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आने वाली है।

 

आचार संहिता के कारण पिछले काफी समय से सरकार के हाथ बंधे हुए थे और कई नीतिगत फैसलों सहित विकास कार्य रुके हुए थे। लेकिन अब बंदिशें हटते ही सुक्खू सरकार ने विकास कार्यों को रफ्तार देने और प्रदेश के प्रशासनिक ढर्रे में बड़े स्तर पर फेरबदल (तबादला आदेश) करने की मुकम्मल तैयारी कर ली है।

 

शिक्षा विभाग में सबसे बड़ा फेरबदल तय

आचार संहिता हटने के बाद सबसे अधिक हलचल शिक्षा विभाग में देखने को मिल सकती है। प्रदेश सरकार सीबीएसई पैटर्न पर संचालित किए जा रहे स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की तैनाती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी में है।

 

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जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग पहले ही 138 प्रधानाचार्यों की काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी कर चुका है। कई प्रधानाचार्यों को उनकी पसंद के अनुसार स्टेशन भी आवंटित किए जा चुके हैं। अब सरकार की मंजूरी के बाद उनके औपचारिक नियुक्ति और तैनाती आदेश जारी किए जा सकते हैं।

8 हजार से अधिक तबादलों की संभावना

विभागीय स्तर पर तैयारियों के अनुसार पहले चरण में लगभग 6 हजार शिक्षकों की सीबीएसई स्कूलों में तैनाती की जाएगी। इस प्रक्रिया के साथ ही बड़े स्तर पर तबादलों का सिलसिला शुरू होगा। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि कुल मिलाकर 8 हजार से अधिक शिक्षकों के स्थानांतरण होने की संभावना है। इनमें प्रवक्ता, टीजीटी, सीएंडवी, जेबीटी, पीईटी, डीपीई और अन्य श्रेणियों के शिक्षक शामिल रहेंगे।

 

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सीबीएसई स्कूलों में विषयवार और आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर स्टाफ पुनर्संरचना की जाएगी। यही कारण है कि इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा शिक्षक स्थानांतरण अभियान माना जा रहा है।

रुकी हुई काउंसलिंग प्रक्रिया फिर होगी शुरू

आचार संहिता लागू होने से पहले शिक्षा विभाग शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में था, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के चलते इसे रोकना पड़ा। अब चुनाव समाप्त होने के बाद विभाग इस प्रक्रिया को दोबारा शुरू करेगा। काउंसलिंग के माध्यम से शिक्षकों को नई तैनाती और स्थानांतरण विकल्प दिए जाएंगे ताकि सीबीएसई स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।

 

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लोक निर्माण और जल शक्ति विभाग में भी बढ़ेगी रफ्तार

सिर्फ शिक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और अन्य सरकारी विभागों में भी आचार संहिता के कारण रुके हुए कई कार्य अब शुरू होंगे। चुनावी प्रतिबंधों के चलते जिन विकास परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया रुकी हुई थी, उन्हें दोबारा शुरू किया जाएगा। कई सड़क, पेयजल और निर्माण परियोजनाओं को भी मंजूरी मिलने की संभावना है। सरकारी विभागों को उम्मीद है कि चुनावी प्रतिबंध हटने के बाद विकास कार्यों की गति फिर से सामान्य हो जाएगी और लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होगी।

 

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कुछ सीबीएसई स्कूलों में पुरानी व्यवस्था 

प्रदेश के कुछ सीबीएसई स्कूल ऐसे भी हैं जहां नए प्रधानाचार्य पदस्थापना के लिए पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई गई। ऐसे में फिलहाल वहां पहले से कार्यरत प्रधानाचार्य ही जिम्मेदारी संभालते रह सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार के आदेशों के बाद ही लिया जाएगा।

सरकार के फैसलों पर टिकी निगाहें

चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब कर्मचारियों और अधिकारियों की निगाहें सरकार के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं। विशेष रूप से शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर होने वाले संभावित तबादले और नियुक्तियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। यदि विभागीय तैयारियों के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश में हजारों शिक्षकों और अधिकारियों के कार्यस्थल बदल सकते हैं। इसके साथ ही रुकी हुई विकास योजनाओं को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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