सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां सलोगड़ा बस्ती में एक नवजात बच्ची नग्न अवस्था में पड़ी मिली है। बच्ची बावड़ी के पास झाड़ियों में लावारिस हालत में पड़ी मिली है।
बावड़ी के पास मिली नवजात बच्ची
बताया जा रहा है बच्ची बहुत जोर-जोर से रो रही थी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे। बच्ची की हालत को देखकर ग्रामीणों के होश उड़ गए।
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शरीर पर नहीं था कोई कपड़ा
इन दिनों मौसम में बदलाव हो रहा है। इस मौसम में नवजात बिना कपड़ों के बावड़ी में बिना कपड़ों के पड़ी हुई थी। गनीमत रही कि बच्ची को कुछ हुआ नहीं। ठंड के कारण बच्ची की जान भी जा सकती थी।
कपड़े धोने जा रही थी महिला
मिली जानकारी के अनुसार, घटना बीते कल शाम करीब चार बजे की है। सलोगड़ा गांव की एक महिला कपड़े धोने के लिए बावड़ी की ओर जा रही थी। इसी दौरान उसे एक बच्ची के रोने की आवाज आई। बच्ची की रोने की आवाज सुनकर महिला वहां पहुंची- बच्ची को वहां अकेले पड़ा हुए देख कर उसे होश उड़ गए।
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अस्पताल में नवजात बच्ची
संतोष ने बच्ची को गोद में उठाया और अपने भाई के साथ बच्ची को लेकर सोलन अस्पताल पहुंची। साथ ही इस बाबत पंचायत प्रधान और पुलिस को सूचित किया। फिलहाल, बच्ची को सोलन अस्पताल में चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती किया गया है। बच्ची डॉक्टरों की निगरानी में ही है। नवजात बच्ची को अस्पताल में प्राथमिक चिकित्सा दी जा रही है। बच्ची की हालत ठीक बताई जा रही है।
जा सकती थी बच्ची का जान
विदित रहे कि, बीते करीब दो महीने पहले भी बिलासपुर के मलोखर के चडाऊ गांव में सुबह-सवेरे बिना कपड़ों के एक नवजात बच्ची पड़ी मिली थी। बच्ची पेड़ के पास पानी की सूखी कुहल में एक लावारिस हालत में मिली थी। लोगों का कहना है कि बच्ची को ऐसे ठंड में लावारिस छोड़ने से उसकी जान भी जा सकती थी। वहीं, कोई जंगली जानवर भी बच्ची पर हमला कर सकता था।
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दोषियों को मिले कड़ी सजा
उधर, जिले से सामने आ रही ऐसी घटनाओं को लेकर लोगों ने काफी रोष व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि यह काफी चिंता का विषय है कि कैसे लोग किसी नवजात शिशु को इस तरह सड़क पर छोड़ देते हैं। लोगों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
मामले की पुष्टि करते हुए SP गौरव सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस टीम द्वारा पता लगाया जा रहा है कि आखिर बच्ची को यहां कौन और क्यों छोड़ कर गया है।
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ले सकते हैं बच्ची को गोद
बताया जा रहा है कि कुछ घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखने के बाद नवजात शिशु को चाइल्ड वेल्फेयर सोसायटी को सौंप दिया जाएगा। वहीं, अगर कोई दंपति बच्चे को गोद लेना चाहेगा तो बच्चे की सुरक्षा के लिहाज से सभी औपचारकिताएं पूरी करने के बाद बच्चा गोद ले पाएगा। उधर, पुलिस टीम द्वारा मामले की जांच की जा रही है और दोषियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया
- ऑनलाइन आवेदन- दत्तक ग्रहण के लिए सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करें।
- दस्तावेज़ जमा करना- आधार कार्ड, पेन कार्ड, विवाह प्रमाणपत्र, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, और जन्म प्रमाणपत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड करें।
- आवेदन की समीक्षा- जिला बाल संरक्षण इकाई या लोकमित्र केंद्र से आवेदन की समीक्षा की जाएगी।
- मूल्यांकन प्रक्रिया- दत्तक माता-पिता का शारीरिक, मानसिक, और आर्थिक मूल्यांकन किया जाएगा।
- मंजूरी- यदि सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो दत्तक ग्रहण के लिए मंजूरी दी जाएगी।
- चयनित बच्चा- आवेदन के बाद, उपलब्ध बच्चों में से चयनित बच्चा दत्तक माता-पिता को दिया जाएगा।
- न्यायिक प्रक्रिया- दत्तक ग्रहण की अंतिम मंजूरी के लिए न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
- पंजीकरण- दत्तक ग्रहण के बाद, बच्चे का नामकरण और पंजीकरण किया जाएगा।
