सोलन। हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल के भाई 81 वर्षीय राम कुमार बिंदल पर 25 वर्षीय युवती द्वारा लगाए गए दुष्कर्म के आरोप एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। इस बार चर्चा का कारण पुलिस की जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट है। फॉरेंसिक रिपोर्ट ने एक ऐसा बड़ा खुलासा हुआ है, जो आने वाले समय में आरोपी बनाए गए राम कुमार बिंदल की मुश्किलों को बढ़ा सकता है।
राम कुमार बिंदल पर लगे आरोपों में बड़ा खुलासा
फॉरेंसिक रिपोर्ट ने डॉ राम कुमार बिंदल के खिलाफ युवती द्वारा लगाए गए दुराचार मामले में गंभीर मोड़ आ गया है। ताज़ा रिपोर्ट में युवती से मिले जैविक नमूनों में मौजूद लार के सैंपल आरोपी से मेल हो गए हैं, जिससे मामले की दिशा बदल गई है और युवती द्वारा लगाए गए आरोपों को मजबूती मिली है। ऐसे में डॉ राम कुमार बिंदल एक बार फिर मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं।
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फॉरेंसिक रिपोर्ट ने बढ़ाया दबाव
पुलिस के अनुसार पीड़िता के शरीर से लिए गए जैविक सबूतों की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे शिकायत में दर्ज आरोपों को वैज्ञानिक आधार देते हैं। सोलन के पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने पुष्टि की है कि युवती के शरीर पर मिले saliva samples और आरोपी के नमूने में समानता पाई गई है। यह मेल होना जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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पुलिस का कहना है कि पहले से जुटाए गए तकनीकी, भौतिक, और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी आरोपों को ताकत देते रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरह से घटना वाले दिन पीड़िता का क्लिनिक से रोते हुए निकलना सीसीटीवी फुटेज में मिला है। उसके बाद क्लिनिक में उस समय महिला स्टाफ का न होना, मरीज रजिस्टर से वह पन्ना फाड़ा जाना, जिसमें युवती का नाम था, घटना के तुरंत बाद क्लिनिक में अचानक साफ.सफाई कर ताला लगा देना इन सब तथ्यों ने जांच एजेंसी को शुरुआती दौर में ही संदेह की दिशा में आगे बढ़ाया था।
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7 अक्टूबर को दर्ज हुआ था मामला
7 अक्तूबर को सिरमौर की 25 वर्षीय युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने आरोप लगाया था कि इलाज के बहाने उसके साथ क्लिनिक के भीतर दुराचार किया गया।
शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने डॉ राम कुमार बिंदल को गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी। सूत्रों की माने तो अब जब फॉरेंसिक साक्ष्य आरोपों की पुष्टि कर रहे हैं, पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
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प्रश्नों के घेरे में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के दावे
इस मामले के सामने आने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था। लेकिन, फॉरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस की वैज्ञानिक जांच ने इस घटनाक्रम को एक बार फिर सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तव में साज़िश है, या फिर एक ऐसा मामला है जिसमें एक 25 वर्षीय युवती न्याय के लिए संघर्ष कर रही है।
महिला आयोग भी सक्रिय
हिमाचल महिला आयोग पहले ही इस मामले में रिपोर्ट मांग चुका है और पुलिस से निष्पक्ष व तेज़ जांच करने को कहा गया है। युवती के लिए यह बेहद संवेदनशील और कठिन समय है, जबकि आरोपी की उम्र और राजनीतिक संबंध मामले को और अधिक जटिल बना रहे हैं।
