कांगड़ा। हिमाचल के कांगड़ा जिले में देहरा के संसारपुर टैरेस में चल रही QURY फार्मास्युटिकल्स की फैक्ट्री से नकली दवाओं का बड़ा खेल पकड़ा गया है। जिस फैक्ट्री पर भरोसेमंद दवाएं बनाने की जिम्मेदारी थी, वहीं पर बीमारी मिटाने की जगह मौत बांटने का काम किया जा रहा था। यह सिर्फ कानून तोड़ने का मामला नहीं, बल्कि ऐसा अपराध जो सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहा है।
फैक्ट्री पर गंभीर आरोप
पूरा मामला जुलाई 2025 का है। 15 जुलाई को दर्ज एफआईआर में कंपनी पर नकली दवा बनाने और कॉपीराइट उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2) और कॉपीराइट एक्ट की धारा 63 के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने शुरुआती जांच में टीम ने फैक्ट्री से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाएं जब्त की थीं, जिसने पूरे विभाग अलर्ट हो गया।
फैक्ट्री को नोटिस, उत्पादन बंद
औषधि विभाग के सहायक औषधि नियंत्रक ने 21 नवंबर को आदेश जारी किए थे। इसके बाद दवा निरीक्षक ने पुलिस और पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में फैक्ट्री प्रबंधन को नोटिस सौंपा। नोटिस मिलते ही फैक्ट्री का पूरा उत्पादन बंद करवा दिया गया। इसके साथ ही, परिसर के सभी सेक्शन सील कर दिए गए ताकि कोई भी गतिविधि जारी न रह सके।
हिमाचल में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
हिमाचल में नकली दवाओं के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि फार्मा सेक्टर में ऐसी अवैध गतिविधियों को किसी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। देहरा में हुई इस बड़ी रेड के बाद सरकार ने भी साफ संदेश दिया है कि दवा उद्योग में गड़बड़ी करने वालों पर अब और कड़ी कार्रवाई होगी।
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अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में ऐसी फैक्ट्रियों की सख्त जांच होगी और अवैध दवा कारोबार को पूरी तरह खत्म करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। यह कदम लोगों की सुरक्षा और भरोसे को बचाने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
बैंक खातों और लेनदेन की जांच शुरू
पुलिस ने फैक्ट्री मालिकों के बैंक खातों और लेनदेन की जांच भी शुरू कर दी है। पुलिस समझने की कोशिश कर रही है कि नकली दवाओं का कारोबार कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग जुड़े हुए थे।
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कई राज्यों में नकली दवा सप्लाई
एसपी मयंक चौधरी ने स्पष्ट कहा कि नकली दवा बनाना गंभीर अपराध है और इससे लोगों की जान जा सकती है। इसलिए पुलिस इस तरह के मामलों में जीरो टॉलरेंस के तहत काम कर रही है। जांच टीमें अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यहां से बनी नकली दवाएं किन राज्यों और बाजारों में सप्लाई की जाती थीं और इस पूरे रैकेट में कौन-कौन शामिल था।
