#हादसा
November 22, 2025
हिमाचल : गड्ढे में धंसा स्कूल बस का टायर, बाल-बाल बची 8वीं की छात्रा, NHAI पर भड़के मंत्री
मंत्री अनिरुद्ध सिंह पहले ही उठा चुके हैं आवाज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के उपनगर भट्टाकुफर में आज सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां एक सरकारी स्कूल बस के नीचे अचानक सड़क धंस गई, जिससे लगभग 15 फीट गहरा और 7–8 फीट चौड़ा गड्ढा बन गया। उसी समय बस में चढ़ने की कोशिश कर रही एक स्कूली बच्ची फिसलकर नीचे जा गिरी।
मिली जानकारी के अनुसार, सुबह के समय यह बस ऑकलैंड हाउस स्कूल के बच्चों को लेने भट्टाकुफर आई थी। बस में चढ़ते हुए कक्षा आठ की छात्रा प्रियांशी का पैर अचानक फिसला और वह सीधे धंसी हुई सड़क में जा गिरी। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए उसे सुरक्षित बाहर खींच लिया। घटना के बाद भट्टाकुफर के लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
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उनका आरोप है कि जिस स्थान पर सड़क धंसी है, उसके ठीक नीचे नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा फोरलेन परियोजना के तहत टनल का निर्माण चल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब है और लगातार हो रही धंसान और दरारें इसी की देन हैं।
पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने अपने सोशल अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि बच्ची को तुरंत रस्सी की मदद से बाहर निकाला गया और वह पूरी तरह सुरक्षित है। गड्ढा बनने से एचआरटीसी की बस (HP-63A-8832) का अगला पहिया अंदर धंस गया। लोगों का कहना है कि यदि बस थोड़ी और आगे बढ़ जाती तो पूरा वाहन ही गड्ढे में समा सकता था। अब बस को क्रेन की मदद से बाहर निकालने की तैयारी की जा रही है।
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गौरतलब है कि, इस परियोजना की गुणवत्ता को लेकर पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह पहले भी चिंताएं जता चुके हैं। उन्होंने एनएचएआई के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा था कि टनल निर्माण में तकनीकी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। मंत्री ने इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को भी लिखित रूप में जानकारी दी है।
भट्टाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर (नीटू) ने भी इस घटना को NHAI की गंभीर लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि टनल निर्माण शुरू होने के बाद से क्षेत्र के कई घर structurally कमजोर हो गए हैं। बरसात के समय एक बहुमंजिला मकान पहले ही पूरी तरह जमींदोज हो चुका है। पार्षद का कहना है कि टनल खुदाई और निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है, जिसकी मार अब स्थानीय लोगों को झेलनी पड़ रही है।