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November 22, 2025

हिमाचल के बागवानों को मालामाल कर रहा जापानी फल, सेब-आनार से कम आ रहा खर्च

जापानी फल ने बदली बागवानों की आर्थिकी

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Himachal Agriculture

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला अब सेब और अनार के साथ-साथ अब जापानी फल की सफल बागवानी के लिए भी प्रमुखता से पहचाना जाने लगा है। मौसम के अनुकूल होने और लागत कम आने के कारण पिछले कुछ वर्षों में बागवानों की जापानी फल के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है।

खेती में बदलाव और बढ़ती आमदनी

जानकारी के अनुसार, खोखन गांव के बागवान मदन लाल बताते हैं कि पहले खेतों में गेहूं और मक्की जैसी पारंपरिक फसलें उगाई जाती थीं। लेकिन जापानी फल की बागवानी शुरू करने के बाद उनकी आर्थिकी में बड़ा सुधार आया है। इस फल को न कीटनाशक की जरूरत होती है और न अधिक खाद की। बाजार में यह 120 से 180 रुपये प्रति किलो बिक रहा है

 

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इसलिए कम लागत में अच्छा मुनाफा मिल रहा है। गड़सा घाटी के योगराज ठाकुर ने भी मौसम में बदलाव और अनार की फसल में बढ़ती बीमारियों के चलते अनार के पेड़ हटाकर जापानी फल के बगीचे लगाए हैं। उनका कहना है कि अनार की तुलना में यह फसल अधिक सुरक्षित और लाभकारी साबित हो रही है।

जापानी फल की बढ़ती मांग और उत्पादन

कुल्लू में जापानी फल का क्षेत्रफल 2023 के 200 हेक्टेयर से बढ़कर 2025 में 404 हेक्टेयर पहुंच गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जिले में 1400 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 2023-24 में 1250 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था। बागवानी विभाग के अनुसार पौधारोपण का सही समय जनवरी माह होता है। इस फल का सीजन सेब के बाद शुरू होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग और दाम दोनों अधिक रहते हैं।

 

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सरकारी अनुदान और सहूलियतें

प्रदेश सरकार जापानी फल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर 62,500 रुपये का अनुदान दे रही है। पावर टिलर और स्प्रेयर पर 50% सब्सिडी, जबकि पक्षियों और ओलावृष्टि से बचाव के लिए नेट पर 80% अनुदान दिया जाता है।

फल के गुण और बागवानी के फायदे

जापानी फल में विटामिन A, C, B1, B2, फोलेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर की उच्च मात्रा होती है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. उत्तम पराशर के अनुसार यह फल पहाड़ी क्षेत्रों में सेब की तरह आसानी से उगाया जा सकता है और कम बीमारी के कारण इसकी देखभाल भी सरल है। जापानी फल की फुयु और हेचिया किस्में हिमाचल में पाई जाती हैं, जिनमें फुयु की बाजार में सबसे अधिक मांग है।

 

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बाजार में बढ़ती कीमतें

भुंतर मंडी के व्यापारियों के अनुसार दक्षिण भारत में जापानी फल की भारी मांग है, जहां यह 200 से 400 रुपये किलो तक बिक रहा है। कई राज्यों के व्यापारी सीधे बागवानों से बगीचे में ही खरीद कर रहे हैं। आज कुल्लू जिला जापानी फल उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन चुका है और करीब 15,000 बागवान इसकी खेती कर रहे हैं, जिससे यह फल क्षेत्र की नई आर्थिक शक्ति बनता जा रहा है।

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