हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। पुलिस द्वारा लगातार जागरूक करने के बावजूद लोग अब भी शातिर ठगों के जाल में फंस रहे हैं। इस बार ठगों ने खुद को एंटी टेररिस्ट सेल का अधिकारी बताकर 78 वर्षीय बुजुर्ग और उनकी पत्नी को 20 घंटे तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखे रखा और उनसे 80 हजार रुपये ठग लिए।

 सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी को आया फोन

प्राप्त जानकारी के अनुसार,  जिला हमीरपुर के रहने वाले 78 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी और उनकी पत्नी के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां पर 19 फरवरी की दोपहर करीब तीन बजे उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया।

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कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेरर सेल का अधिकारी बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर और बैंक खाते का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में हुआ है। यहां तक कि दिल्ली बम ब्लास्ट से जुड़े मामले में उनका नाम आने की बात कहकर उन्हें बुरी तरह डरा दिया गया। 

वीडियो कॉल कर दिखाए फर्जी आईडी कार्ड 

शुरुआत में बुजुर्ग को शक हुआ, लेकिन ठगों ने वीडियो कॉल कर फर्जी आईडी कार्ड और कथित सरकारी दस्तावेज दिखाए। जांच और दस्तावेज सत्यापन के नाम पर उनसे 80 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए गए। इसके बाद ठगों ने उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर जोड़े रखा। 

6 लाख की FD तुड़वाने  बैंक पहुंचे दंपति 

अगले दिन ठगों ने  बुजुर्ग को कहा कि अपनी 6 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर रकम तैयार रखें। इतना ही नहीं, डर का ऐसा माहौल बनाया कि बुजुर्ग दंपति अगले दिन 6 लाख रुपये की एफडी तुड़वाने बैंक तक पहुंच गए।

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शाखा प्रबंधक ने उन्हें अपने केबिन में बुलाकर विस्तार से बात की। बातचीत के दौरान बुजुर्ग काफी घबराए हुए थे। उन्होंने पूरी घटना बताई और बताया कि फोन पर अभी भी वीडियो कॉल चल रही है। शाखा प्रबंधक ने फोन लेकर बात की तो साफ हो गया कि यह साइबर ठगी है।

साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज की शिकायत 

इसके बाद बैंक प्रबंधन ने तुरंत बुजुर्ग के बच्चों को सूचना दी। उनके बच्चे बाहर रहते हैं, जिन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। एहतियात के तौर पर बुजुर्ग का नया बैंक खाता खोलकर उनकी रकम सुरक्षित ट्रांसफर कर दी गई। बैंक मैनेजर की सतर्कता से एक बड़ी ठगी होने से बच गई और दंपति की जीवनभर की जमा पूंजी सुरक्षित रह गई।

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अनजान कॉल आने पर क्या करें ?

  • कॉल करने वाले की पहचान की पुष्टि करें।
  • अगर धोखाधड़ी का शक हो तो तुरंत फोन काट दें।
  • तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत करें।
  • ऑनलाइन वित्तीय ठगी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
  • साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर लॉग इन कर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • दूसरों को जागरूक करने के लिए अपना अनुभव साझा करें।

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बिल्कुल भी न करें ये गलती

  • अनजान नंबर पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी न दें।
  • संदिग्ध कॉल पर ज्यादा बातचीत न करें।
  • किसी के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें।
  • किसी को भी OTP साझा न करें।
  • खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले अनजान व्यक्ति पर भरोसा न करें।
  • किसी भी तरह का डर या दबाव बने तो पहले बैंक या पुलिस से पुष्टि करें।

पुलिस नहीं करती डिजिटल अरेस्ट

SP हमीरपुर ठाकुर ने साफ कहा है कि पुलिस कभी भी किसी को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती। अगर कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे या निजी जानकारी मांगे तो घबराएं नहीं। न तो पैसे ट्रांसफर करें और न ही बैंक डिटेल या OTP साझा करें। तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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