मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के धर्मपुर से कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर की पत्नी कविता शेखर लकड़ी तस्करी के मामले में उलझ गई हैं। वन विभाग की जांच रिपोर्ट में बाहरी रिन्यूएबन एनर्जी नाम की कंपनी के परिसर में 5000 क्विंटल से अधिक लकड़ी बिना अनुमति के डंप पाई गई है। कविता शेखर इस कंपनी की डायरेक्टर हैं।
किस मकसद से जमा किया है स्टॉक
वन विभाग की जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि बाहरी रिन्यूएबन एनर्जी के परिसर तक इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी को लाने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। हालांकि, रिपोर्ट में यह सवाल नहीं उठाया गया है कि कविता की कंपनी में लकड़ी का इतना बड़ा स्टॉक किस मकसद से जमा कर रखा गया है।
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यहां यह सवाल भी मौजूं है कि कहीं हिमाचल से बेशकीमती लकड़ियों की अवैध तस्करी इसका मकसद तो नहीं है।
5 पेज की रिपोर्ट में खानापूर्ति
24 दिसंबर को गठित वन विभाग की 7 सदस्यी जांच कमेटी ने इस मामले पर केवल 5 पेज की रिपोर्ट बनाई है। इस रिपोर्ट में कविता की कंपनी के इस अवैध कारनामे के लिए उनके खिलाफ एफआईआर करने की भी सिफारिश नहीं की गई है। रिपोर्ट में यह जरूर कहा गया है कि वन विभाग के सवालों का जवाब देने के लिए 3 बार नोटिस भेजने के बाद भी कविता ने कोई जवाब नहीं दिया।
वनों के विनाश की कोई जिम्मेदारी नहीं
यह मामला हिमाचल विधानसभा में भी गूंज चुका है और सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू खुद इसकी उच्च स्तरीय जांच का आदेश दे चुके हैं। इसके बावजूद वन विभाग की रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश के वनों के इस विनाश के लिए किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
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रिपोर्ट में वन विभाग के उच्च अधिकारियों पर आगे की कार्रवाई का जिम्मा डाल दिया गया है।
विधायक के गांव में लकड़ियों का ढेर
कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर के बाहरी गांव में 5,235 क्विंटल लकड़ियों का ढेर लगा मिला है। इनमें 507 क्विंटल लकड़ियां उन पेड़ों की भी हैं, जिन्हें काटने पर हिमाचल प्रदेश में पाबंदी है।
डिपो के लिए मांगा था लाइसेंस, नहीं मिला
बाहरी रिन्यूएबन एनर्जी ने 27 नवंबर 2024 को जलाऊ लकड़ी के एक डिपो के लिए लाइसेंस मांगा था। लेकिन कंपनी को अभी तक लाइसेंस मिला नहीं है।
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इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में जंगल से लकड़ियां कटवाकर स्टोर किया गया है।
ऐसे खुला पूरा मामला
मंडी जिले के पूर्व पार्षद भूपेंद्र सिंह की आरटीआई से यह पूरा मामला खुला है। वन विभाग ने अपनी जांच में पाया है कि धर्मपुर के हुकुम चंद और खेलाग लोंगली गांव के बाबू राम ने काटे गए पेड़ों को बिना अनुमति के कविता की कंपनी के परिसर तक पहुंचाया था। दोनों ने यह बात कबूली भी है।
