कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पहले ही साफ कर चुके हैं कि कौन चुनाव लड़ सकता है और कौन नहीं। इसके बावजूद कुछ सरकारी कर्मचारियों द्वारा चुनाव मैदान में उतरने के मामले सामने आने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक सरकारी कर्मचारी ने पंचायत प्रधान पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। मामला सामने आने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया और जांच व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

सरकारी नौकरी में रहते भरा प्रधान पद का फॉर्म

जानकारी के मुताबिक यह मामला विकास खंड सुरानी की पंचायत कोपड़ा का है। यहां जल शक्ति विभाग में तैनात एक वरिष्ठ सहायक ने पंचायत प्रधान पद के लिए नामांकन दाखिल किया था।

 

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हैरानी की बात यह है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी अधिकारी का इस ओर ध्यान नहीं गया कि उम्मीदवार सरकारी कर्मचारी है। इतना ही नहीं, संबंधित कर्मचारी को चुनाव चिन्ह तक आवंटित कर दिया गया था। मामला सामने आने के बाद अब निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

दोबारा हो रही नामांकन पत्रों की जांच

मामला अधिकारियों के संज्ञान में आते ही प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। अब सहायक निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रधान पद के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की दोबारा स्क्रूटनी की जा रही है।

 

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नियमों के अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी पंचायत चुनाव लड़ने का पात्र नहीं होता। ऐसे में संबंधित कर्मचारी का नामांकन रद्द होना लगभग तय माना जा रहा है। नामांकन रद्द होने के बाद प्रधान पद के लिए मैदान में पांच उम्मीदवार ही बचेंगे।

FIR दर्ज करने की तैयारी

प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है। सूत्रों के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने और गलत जानकारी देकर नामांकन दाखिल करने के आरोप में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि मामले में FIR दर्ज करने पर भी विचार किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो संबंधित कर्मचारी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

 

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इलाके में गरमाया चुनावी माहौल

इस घटनाक्रम के बाद ज्वालामुखी क्षेत्र में राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है। लोग इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। वहीं विपक्षी लोग भी चुनाव प्रक्रिया में हुई इस बड़ी चूक पर सवाल उठा रहे हैं।