#अपराध
May 15, 2026
हिमाचल: नशे की ओवरडोज ने दो महीने में बुझा दिए 5 घरों के चिराग, 3 साल में 66 मौ*तें
हिमाचल में युवाओं को लील रहा नशा, अभिभावकों की बढ़ाई चिंता
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शिमला। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में नशे का बढ़ता जाल अब केवल कानून व्यवस्था की चुनौती नहीं रहा] बल्कि यह समाज और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरे के रूप में सामने आने लगा है। प्रदेश में तेजी से फैल रही चिट्टे और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स की लत अब युवाओं की जिंदगी निगल रही है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि पिछले दो महीनों के भीतर ही राजधानी शिमला स्थित आईजीएमसी में नशे की ओवरडोज से पांच युवकों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं।
इन घटनाओं ने एक बार फिर हिमाचल में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस उम्र में युवा अपने सपनों और भविष्य को संवारने की तैयारी करते हैं] उसी उम्र में कई युवक नशे की गिरफ्त में आकर मौत के मुंह में समा रहे हैं।
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आईजीएमसी में पहुंचे मामलों की प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह संकेत मिले हैं कि युवकों की मौत का कारण नशे की ओवरडोज रहा है। फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने सैंपल आगे जांच के लिए एफएसएल जुन्गा भेज दिए हैं। बताया जा रहा है कि मृतकों में ज्यादातर युवा टैक्सी चालक थे और वे शिमला सहित आसपास के जिलों से संबंधित थे। इन लगातार सामने आ रहे मामलों ने अभिभावकों और समाज दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
प्रदेश में नशे की भयावह स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन वर्षों में नशे की ओवरडोज से 66 लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है। वर्ष 2023 में जहां 8 मौतें हुई थीं, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 31 तक पहुंच गया। वर्ष 2025 में अब तक 27 लोगों की जान जा चुकी है। ये आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि हिमाचल में नशे का नेटवर्क तेजी से युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है और समय रहते इस पर प्रभावी रोक नहीं लगी तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
हालांकि पुलिस लगातार नशा तस्करों के खिलाफ अभियान चला रही है और चिट्टे के कई बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद युवाओं तक नशा पहुंचना बंद नहीं हो पा रहा। पिछले साल भी नशे की ओवरडोज से मौत के कई मामलों में पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के केस दर्ज किए थे। बावजूद इसके, नशे का कारोबार और इसकी खपत दोनों लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं।
विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नशे से होने वाली मौतों का वास्तविक आंकड़ा सरकारी रिकॉर्ड से कहीं अधिक हो सकता है। कई परिवार सामाजिक बदनामी और लोकलाज के डर से ऐसे मामलों की जानकारी पुलिस को नहीं देते। कुछ मामलों में परिजन युवाओं को अस्पताल तक भी नहीं पहुंचाते। इसी कारण नशे की ओवरडोज से होने वाली मौतों के कई मामले आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पाते।
विशेषज्ञों के अनुसार युवा अक्सर दोस्तों के दबाव, शौक या दिखावे में जरूरत से ज्यादा नशा कर लेते हैं। शरीर अत्यधिक मात्रा में नशीले पदार्थों को सहन नहीं कर पाता, जिससे श्वसन प्रणाली प्रभावित हो जाती है और कई मामलों में हृदय गति रुकने से मौत हो जाती है।
इसके अलावा सिंथेटिक ड्रग्स में मिलाए जाने वाले खतरनाक रसायन और मिलावटी पदार्थ भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। कई बार चिट्टे में टेलकम पाउडर और अन्य नशीले रसायनों की मिलावट युवाओं के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाती है।