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May 17, 2026

सुक्खू सरकार ने लिया ऐतिहासिक फैसला, अब जेल से बाहर नहीं आएंगे खतरनाक कैदी, जानें वजह

आरोपियों के भागने और कोर्ट परिसर में होने वाले गैंगवार से लिया सबक

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himachal govt decision

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब प्रदेश की जेलों में बंद गंभीर आरोपियों को पेशी के लिए जेल से बाहर नहीं निकाला जाएगा। सुक्खू सरकार के इस फैसले के बाद अब प्रदेश की जेलों में बंद गंभीर अपराधों के आरोपियों को पेशी के लिए अदालतों तक नहीं लाया जाएगा।

 

उनकी पेशियां केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए करवाई जाएंगी। सरकार का यह कदम उन घटनाओं से सबक लेते हुए उठाया गया है, जिनमें कैदियों ने कोर्ट ले जाते समय पुलिस गिरफ्त से भागने की कोशिश की, वहीं कोर्ट परिसरों में गैंगवार और फायरिंग जैसी हिंसक वारदातों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे।

 

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प्रदेश सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल अदालत परिसरों की सुरक्षा मजबूत होगी] बल्कि कैदियों के ट्रांजिट के दौरान होने वाले हमलों, भगाने की साजिशों और पुलिस पर होने वाले जानलेवा हमलों पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।

गृह विभाग ने जारी किए सख्त आदेश

प्रदेश के गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 303(1) के तहत यह फैसला लागू किया गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कमलेश कुमार पंत की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि गंभीर और संगीन मामलों में बंद कैदियों की पेशी अब अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही होगी।

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सरकार ने माना कि बीते कुछ समय में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां अपराधियों ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। इतना ही नहीं, कोर्ट परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर विरोधी गैंगों के बीच फायरिंग और हिंसक झड़पों ने आम लोगों में डर का माहौल पैदा किया। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।

कैदियों के भागने की घटनाओं से लिया सबक

सूत्रों के अनुसार प्रदेश में कई बार ऐसे हालात बने, जब पेशी के दौरान कैदियों को छुड़ाने की कोशिश की गई। कुछ मामलों में पुलिस पर हमले हुए, जबकि कुछ जगहों पर हथियारों का खुलेआम इस्तेमाल किया गया।

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इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे में सुक्खू सरकार ने यह फैसला लेते हुए साफ संकेत दिया है कि अब अपराधियों के खिलाफ सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

पुलिस बल पर भी कम होगा दबाव

सरकार के इस फैसले से पुलिस विभाग को भी बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब कैदियों को जेल से कोर्ट तक लाने और वापस पहुंचाने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की जरूरत कम पड़ेगी। इसके अलावा रास्ते में होने वाले हमलों, भागने की कोशिशों और सुरक्षा जोखिमों से भी काफी हद तक बचाव होगा। माना जा रहा है कि इससे पुलिस अपनी ऊर्जा कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण पर अधिक केंद्रित कर सकेगी।

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इन 7 श्रेणियों के कैदियों पर लागू होंगे नए नियम

1. देश विरोधी और आतंकी गतिविधियों में शामिल आरोपी

यूएपीए 1967 और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 के तहत दर्ज मामलों के आरोपी।

2. संगठित अपराध और आतंकी कृत्य करने वाले

बीएनएस की धारा 111 और 113 के तहत आने वाले अपराधी।

3. सीरियल किलर और हत्या के आरोपी

दो या अधिक हत्या मामलों तथा हत्या के प्रयास के आरोपियों को भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश किया जाएगा।

4. बड़े ड्रग्स तस्कर

एनडीपीएस एक्ट के तहत व्यावसायिक मात्रा में नशा तस्करी करने वाले और बार-बार अपराध करने वाले आरोपी।

5. गैंगस्टर, डकैत और सुपारी किलर

गैंगवार, डकैती, जबरन वसूली और हथियार कानून उल्लंघन से जुड़े आरोपी।

6. राज्य के खिलाफ अपराध करने वाले

भारतीय न्याय संहिता 2023 के अध्याय-7 और धारा 160 के तहत दर्ज मामलों के आरोपी।

7. पॉक्सो और दुष्कर्म के गंभीर आरोपी

पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की गंभीर यौन अपराध धाराओं में दर्ज आरोपी।

सभी विभागों को भेजे गए आदेश

विशेष सचिव (गृह) दलीप कुमार की ओर से इस आदेश की प्रतियां हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, पुलिस महानिदेशक, महानिदेशक जेल, सभी जिला उपायुक्तों और अभियोजन विभाग को भेज दी गई हैं। साथ ही आदेश को तुरंत राजपत्र में प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का दावा है कि यह फैसला हिमाचल में कानून व्यवस्था को नई मजबूती देगा और अदालत परिसरों को अधिक सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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