#अपराध
May 17, 2026
हिमाचल : 51 ग्राम चिट्टे के लिए साढ़े पांच साल चला केस, अब मिली महिला को कठोर सजा
पुलिस को देख महिला ने झाड़ियों में फेंक दिया था नशे का पैकेट
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कांगड़ा। हिमाचल में नशे के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई के बीच धर्मशाला की अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने महिला आरोपी को चिट्टा तस्करी मामले में कठोर सजा सुनाई है।
करीब साढ़े पांच साल तक अदालत में चले इस मामले में 51 ग्राम चिट्टा बरामद होने के बाद अब न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी महिला को जेल भेजने के आदेश दिए हैं। अदालत के इस फैसले को प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार पर सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
यह मामला 7 अक्टूबर, 2020 का है- जब पुलिस थाना डमटाल की टीम नियमित गश्त पर थी। पुलिस जब इंदौरा मोड़ के पास पहुंची तो वहां मौजूद एक महिला पुलिस वाहन को देखकर अचानक घबरा गई।
पुलिस के अनुसार, महिला ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ एक पैकेट झाड़ियों में फेंक दिया और वहां से निकलने की कोशिश करने लगी। महिला की संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए पुलिस टीम ने तुरंत उसे रोक लिया।
मौके पर स्थानीय लोगों को गवाह बनाया गया और पुलिस ने झाड़ियों में फेंके गए पैकेट की तलाशी ली। जांच के दौरान पॉलीथिन में 51.51 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने बरामद नशीले पदार्थ को नियमानुसार कब्जे में लेकर सील किया और आरोपी महिला के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद अदालत में चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बरामदगी, तलाशी प्रक्रिया और गवाहों के बयानों में विरोधाभास होने की दलील दी। बचाव पक्ष का कहना था कि मामले में कई तकनीकी कमियां हैं, जिनका आरोपी को लाभ मिलना चाहिए।
अदालत ने सभी तथ्यों, गवाहों के बयानों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का विस्तार से अध्ययन करने के बाद बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि गवाहों के बयानों में मामूली अंतर होना स्वाभाविक है। इससे मामले के मूल तथ्यों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी महिला के खिलाफ आरोप साबित करने में पूरी तरह सफल रहा है।
इसके बाद पारिवारिक न्यायालय धर्मशाला के विशेष न्यायाधीश-सह-प्रधान न्यायाधीश डॉ. अरविंद मल्होत्रा की अदालत ने आरोपी काजल निवासी छन्नी को NDPS एक्ट की धारा 21 के तहत दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी महिला पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर प्रदेश में बढ़ते नशे के कारोबार और उससे जुड़े अपराधों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चिट्टा तस्करी हिमाचल के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को नशे के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।