कुल्लू। जहां अस्पताल लोगों के लिए जीवन बचाने की आखिरी उम्मीद होते हैंए वहीं अगर उसी परिसर में मिलने वाला खाना ही सेहत के लिए खतरा बन जाए तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला से एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की कैंटीन से सामने आया ताजा मामला न केवल लापरवाही की कहानी बयां करता है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि जब अस्पतालों की कैंटीन में ही मरीजों और तीमारदारों को सुरक्षित भोजन नहीं मिल पा रहा, तो आम लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।
मासूम को खिलाया परांठा, मिले शीशे के टुकड़े
यह घटना 25 दिसंबर की सुबह की बताई जा रही है। बंजार क्षेत्र के दुर्गम सजवाड़ गांव निवासी गुमत राम अपने एक साल के बीमार बच्चे का इलाज करवाने क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू पहुंचे थे। बच्चे के लिए अस्पताल परिसर स्थित कैंटीन से परांठा लेकर आए। मासूम को जब लगभग आधा परांठा खिला दिया गया, तभी उसमें शीशे के टुकड़े नजर आए। यह देख परिजन घबरा गए और तुरंत बच्चे को खाना खिलाना बंद किया।
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डर और चिंता के बीच कैंटीन पहुंचे परिजन
गुमत राम ने बताया कि उन्हें समझ ही नहीं आया कि इस गंभीर लापरवाही की शिकायत किससे करें। वह परांठे में मिले शीशे के टुकड़ों को लेकर सीधे कैंटीन पहुंचे और कर्मचारियों को पूरी बात बताई। परिजनों का आरोप है कि कैंटीन संचालकों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिसके बाद वह मायूस होकर लौट आए।
बच्चे की सेहत को लेकर गहरी चिंता
परिजन इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि कहीं परांठे के साथ शीशे का कोई टुकड़ा बच्चे के पेट में न चला गया हो। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कैंटीन संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए] ताकि भविष्य में किसी और मरीज या तीमारदार के साथ ऐसा न हो।
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पहले भी विवादों में रही कैंटीन और मेस
यह पहला मौका नहीं है जब क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की कैंटीन या मेस सवालों के घेरे में आई हो। इससे पहले मरीजों के खाने में कॉकरोच मिलने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। उस समय भी ठोस कार्रवाई न होने के आरोप लगे थे। अब परांठे में शीशे के टुकड़े मिलने से यह साफ संकेत मिल रहा है कि खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है।
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एक ही ठेकेदार के हाथ में कैंटीन और मेस
जानकारी के अनुसार अस्पताल की कैंटीन और मेस दोनों का संचालन एक ही ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में बार-बार सामने आ रही शिकायतें यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या ठेकेदार मरीजों और तीमारदारों की सेहत को गंभीरता से ले रहा है या फिर सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले पर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तारा चंद का कहना है कि उनके संज्ञान में फिलहाल ऐसा कोई मामला नहीं आया है। यदि इस तरह की घटना सामने आती है, तो ठेकेदार को बुलाकर पूछताछ की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
