चंबा। स्मार्टफोन और इंटरनेट की तेज़ रफ्तार दुनिया में बचपन जैसे सिमटता जा रहा है। जो बातें कभी युवावस्था में समझ आती थीं, वे आज मोबाइल स्क्रीन के जरिए कम उम्र में ही बच्चों तक पहुंच रही हैं। जानकारी की यह बाढ़ कई बार मासूमियत पर भारी पड़ रही है। छोटी उम्र में रिश्तों की जटिलता, गलत संगत और बहकावे का नतीजा कई बार दर्दनाक घटनाओं के रूप में सामने आ रहा है। हिमाचल के चंबा ज़िले से सामने आया एक मामला इसी कड़वी हकीकत की ओर इशारा कर रहा है।

नाबालिगा को भगा ले गया युवक

दरअसल हिमाचल के चंबा जिला में एक नाबालिग किशोरी ने एक बच्चे को जन्म दिया, हालांकि यह बच्चा मृत पैदा हुआ। बताया जा रहा है कि एक युवक कुछ समय पहले किशोरी को बहला फुसला कर अपने साथ भगा कर ले गया था। आरोप है कि युवक ने इस दौरान उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, जिसके चलते किशोरी गर्भवती हो गई। मामले का खुलासा तब हुआ, जब किशोरी के पेट में दर्द होने लगा। पेट दर्द बढ़ने पर किशोरी की मां उसे लेकर अस्पताल पहुंची। 

 

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मृत शिशु को दिया जन्म

बताया जा रहा है कि जब अस्पताल में चिकित्सकों ने किशोरी की मेडिकल जांच की तो लड़की गर्भवती पाई गई। जिसके बाद लड़की ने एक मृत शिशु को जन्म दिया। परिजनों को जब इस बात की जानकारी मिली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज करवाया और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

मां की शिकायत पर हरकत में आई पुलिस

पीड़िता की मां की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की। मामले की पुष्टि करते हुए विजय सकलानी ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ.साथ पोक्सो के तहत मामला दर्ज किया गया है।

 

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जांच जारी न्यायिक प्रक्रिया शुरू

पुलिस के अनुसार मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। 14 दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद आरोपी को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। कानून अपनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, लेकिन यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि डिजिटल दौर में बच्चों की सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सतर्कता से सुनिश्चित की जा सकती है।

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डिजिटल युग में अभिभावकों की बढ़ी जिम्मेदारी

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच अभिभावकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों, मित्र मंडली और व्यवहार पर संवाद और निगरानी आवश्यक है। स्कूलों और समुदाय स्तर पर भी जागरूकता कार्यक्रमों की जरूरत महसूस की जा रही हैए ताकि किशोरों को सुरक्षित व्यवहार और कानूनी परिणामों की जानकारी मिल सके।

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