#राजनीति
February 13, 2026
सियासी अखाड़ा बनी सर्वदलीय बैठक: BJP का वॉकआउट, बोले-केंद्र पर फोड़ रहे "मिस मैनेजमेंट" का ठिकरा
जयराम ठाकुर का आरोप भाजपा के सर पर आर्थिक हालातो का ठीकरा फोड़ना चाहती है सरकार
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के वित्तीय भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ गई। जिस तरह विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष अक्सर सदन से वॉकआउट करता है, ठीक उसी तर्ज पर भाजपा विधायकों ने पीटरहॉफ में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक का बीच में ही बहिष्कार कर दिया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा बुलाई गई इस बैठक का उद्देश्य 'रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट' (RDG) बंद होने के मुद्दे पर एकजुटता दिखाना था] लेकिन भाजपा के वॉकआउट ने यह साफ कर दिया कि प्रदेश के आर्थिक संकट पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की खाई बहुत गहरी हो चुकी है।
बैठक से बाहर निकलते ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने वित्त सचिव द्वारा दी गई प्रेजेंटेशन को भ्रामक करार देते हुए कहा कि सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं और 'फाइनेंशियल मिस मैनेजमेंट' का ठीकरा भाजपा केंद्र सरकार के सिर फोड़ना चाहती है। ठाकुर ने तर्क दिया कि 12वें से लेकर 14वें वित्त आयोग तक ने पहले ही RDG कम करने या बंद करने के संकेत दे दिए थे, ऐसे में सरकार को अपने खर्चों पर लगाम लगानी चाहिए थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि RDG केवल हिमाचल ही नहीं, बल्कि 17 अन्य राज्यों की भी बंद हुई है, इसलिए इसे केंद्र का भेदभाव कहना सरासर गलत है।
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा के वॉकआउट को प्रदेश हित के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ही सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी और उनकी मांग पर बैठक का स्थान सचिवालय से बदलकर पीटरहॉफ किया गया। इसके बावजूद भाजपा नेता उनकी बात सुने बिना ही बाहर चले गए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा के नेता केवल 'राजनीतिक रोटियां' सेक रहे हैं। सुक्खू ने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्र के सामने RDG बहाली की मांग रखने का साहस नहीं दिखा रही और राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को भटका रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा साथ दे या न दे, उनकी सरकार हिमाचल के हक की लड़ाई अकेले लड़ने का माद्दा रखती है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी चुनावी गारंटियों को पूरा करने में असमर्थ है और अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए केंद्र को निशाना बना रही है। बिंदल के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में केंद्र ने हिमाचल को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता और 27,000 करोड़ की RDG प्रदान की है। उन्होंने आरोप लगाया कि 40 महीने सत्ता में रहने के बाद भी अपनी वित्तीय स्थिति न सुधार पाना सरकार की नाकामी है, जिसे वह 'विक्टिम कार्ड' खेलकर छिपाना चाहती है।
इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच माकपा नेता राकेश सिंघा ने एक संतुलित लेकिन गंभीर रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह समय 'पॉलिटिकल स्कोर' सेट करने का नहीं बल्कि हिमाचल के अस्तित्व को बचाने का है। सिंघा ने आगाह किया कि यदि RDG एक बार बंद हो गई, तो इसे दोबारा बहाल करना नामुमकिन हो जाएगा, जिससे प्रदेश का आर्थिक ढांचा चरमरा सकता है। उन्होंने बीबीएमबी (BBMB) में हिमाचल के 7.1 प्रतिशत हिस्से का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य के साथ लंबे समय से भेदभाव हो रहा है और इस पर सभी दलों को एक सुर में बात करनी चाहिए।
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद हिमाचल के सामने संकट गहरा गया है, क्योंकि RDG राज्य के कुल बजट का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा है। जीएसटी (GST) लागू होने के बाद राज्य के पास कर लगाने की शक्तियां सीमित हैं और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आय के स्रोत कम हैं। ऐसे में केंद्र से मिलने वाली ग्रांट का बंद होना विकास कार्यों के साथ-साथ वेतन और पेंशन के भुगतान पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। फिलहाल, यह मुद्दा सुलझने के बजाय आने वाले समय में विधानसभा और जनता के बीच एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने की ओर अग्रसर है।
सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य भले ही आर्थिक संकट पर साझा रणनीति बनाना था, लेकिन बैठक सियासी आरोप-प्रत्यारोप में उलझ गई। सदन की तरह सर्वदलीय बैठक से भी भाजपा के वॉकआउट ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में RDG और वित्तीय प्रबंधन का मुद्दा प्रदेश की राजनीति का केंद्रीय विषय बनेगा। अब देखना यह होगा कि सरकार और विपक्ष मिलकर समाधान निकालते हैं या यह मुद्दा आगामी चुनावी रणनीति का हथियार बनता है।