शिमला। वीरों की धरती और देवभूमि हिमाचल प्रदेश के लिए सोमवार का दिन गौरव, सम्मान और गर्व से भरा रहा। देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में हिमाचल के जवानों की बहादुरी का एक और स्वर्णिम अध्याय उस समय लिखा गया, जब राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में हिमाचल के वीर सपूत मेजर अंशुल बाल्टू को देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में 13 जवानों और अधिकारियों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया।

 

आतंकियों के खिलाफ चलाए गए एक बेहद जोखिमपूर्ण सैन्य अभियान में अदम्य साहस, अद्वितीय नेतृत्व क्षमता और असाधारण वीरता का प्रदर्शन करने वाले मेजर अंशुल बाल्टू को यह सम्मान प्रदान किया गया। राष्ट्रपति के हाथों मिला यह सम्मान न केवल मेजर अंशुल की वीरता का प्रतीक है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और विशेष रूप से शिमला जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है।

 

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वीरभूमि के बेटे ने बढ़ाया प्रदेश का मान

शिमला जिले की जुब्बल तहसील के घुंसा गांव से संबंध रखने वाले मेजर अंशुल बाल्टू भारतीय सेना की 32 असम राइफल्स में अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल है। हिमाचल प्रदेश को लंबे समय से वीरभूमि के नाम से जाना जाता है। देश की रक्षा के लिए यहां के हजारों जवान सेना, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा एजेंसियों में सेवाएं दे रहे हैं। मेजर अंशुल बाल्टू ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिमाचल की मिट्टी में वीरता और राष्ट्रभक्ति रची-बसी है।

आतंकियों से मुठभेड़ में दिखाई असाधारण बहादुरी

मेजर अंशुल बाल्टू को यह सम्मान असम के दीमा हसाओ क्षेत्र में चलाए गए एक विशेष सैन्य अभियान में उनके साहसिक योगदान के लिए मिला है। खुफिया सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने उग्रवादियों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। 

 

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ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों का सामना आतंकियों से हुआ। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और खतरे के बीच मेजर अंशुल ने न केवल अपने दल का नेतृत्व किया, बल्कि अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक आतंकी को ढेर कर दिया। उनकी बहादुरी और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण अभियान सफलतापूर्वक पूरा हुआ और सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली।

साहस और नेतृत्व का मिला राष्ट्रीय सम्मान

सैन्य अभियान में प्रदर्शित असाधारण वीरता, कर्तव्यनिष्ठा और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए मेजर अंशुल बाल्टू को देश के सर्वोच्च वीरता सम्मानों में शामिल शौर्य चक्र के लिए चुना गया।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। इस गौरवपूर्ण क्षण के दौरान उनके पिता प्रमोद बाल्टू, माता प्रेम लता बाल्टू और पत्नी पारुल बाल्टू भी मौजूद रहे। जैसे ही मेजर अंशुल ने यह सम्मान प्राप्त किया, पूरे परिवार की आंखों में गर्व और खुशी साफ दिखाई दी।

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पूरे हिमाचल में खुशी की लहर

मेजर अंशुल बाल्टू के शौर्य चक्र से सम्मानित होने की खबर मिलते ही रोहड़ू, जुब्बल और पूरे शिमला जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे पूरे प्रदेश का सम्मान बताया। लोगों का कहना है कि मेजर अंशुल ने न केवल अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे हिमाचल को गर्व का अवसर दिया है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

मेजर अंशुल बाल्टू की यह उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। उनका साहस, समर्पण और राष्ट्र सेवा के प्रति जुनून यह संदेश देता है कि देश की रक्षा के लिए समर्पित सैनिक हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हैं। वीरभूमि हिमाचल के इस वीर सपूत को मिला शौर्य चक्र केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए उनके अद्वितीय साहस, त्याग और समर्पण की राष्ट्रीय स्वीकृति है। यह गौरवपूर्ण क्षण लंबे समय तक हिमाचल के इतिहास में याद रखा जाएगा।

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