#उपलब्धि
July 17, 2026
हिमाचल: पिता का सिर से उठा साया, सफाई कर्मी मां ने बढ़ाया हौंसला; बेटी ने NEET UG क्रैक कर रचा इतिहास
समीक्षा ने पहले ही प्रयास में पास की NEET UG परीक्षा
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ऊना। मुश्किलें कभी सपनों की उड़ान नहीं रोक सकतीं] अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो। यह कहावत हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की बेटी समीक्षा पर पूरी तरह सटीक बैठती है। सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और पिता के निधन जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद समीक्षा ने वह कर दिखाया है, जो आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
ऊना जिले के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय थानाकलां की छात्रा समीक्षा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में शानदार प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर दिया कि सफलता सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, बल्कि मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास की पहचान होती है।
समीक्षा की सफलता के पीछे संघर्षों से भरी एक लंबी कहानी है। पिता का साया सिर से उठ गया, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर आ गई। आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन मां ने हार नहीं मानी। परिवार का पालन-पोषण करने के साथ-साथ उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया। कठिन हालात के बीच भी उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनकी बेटियां अपने सपनों से समझौता न करें।
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समीक्षा की मां स्वास्थ्य विभाग में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। सीमित आय और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता दी। दूसरी ओर समीक्षा ने भी मां के संघर्ष को अपनी ताकत बनाया और पढ़ाई में पूरी मेहनत झोंक दी।
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महंगे कोचिंग संस्थानों और बड़े संसाधनों के बिना समीक्षा ने ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की और अपने लक्ष्य पर लगातार फोकस बनाए रखा। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने NEET-UG परीक्षा में 720 में से 577 अंक हासिल कर इतिहास रच दिया।समीक्षा ने अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में पूरे देश में 449वां रैंक हासिल किया है, जबकि ऑल इंडिया लेवल पर उसने 19,653वां रैंक पाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
समीक्षा की उपलब्धि केवल एक परीक्षा में सफलता नहीं है, बल्कि यह उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान बैठती हैं। उन्होंने साबित किया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता का रास्ता जरूर निकलता है।
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समीक्षा का सपना केवल डॉक्टर बनना नहीं है, बल्कि समाज के उन गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है, जो बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रहते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी मां को संघर्ष करते हुए देखा है और यही संघर्ष उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। भविष्य में वह एक सफल चिकित्सक बनकर समाज को कुछ लौटाना चाहती हैं।
समीक्षा की इस शानदार उपलब्धि से स्कूल, परिवार और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। विद्यालय प्रशासन ने उनकी सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। शिक्षकों का कहना है कि समीक्षा की मेहनत और अनुशासन अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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आज समीक्षा की कहानी यह संदेश देती है कि आर्थिक अभाव, कठिन परिस्थितियां या संसाधनों की कमी कभी भी सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकती। यदि सपनों को पूरा करने की जिद हो तो संघर्ष भी सफलता की सीढ़ी बन जाता है। ऊना की यह बेटी आज सिर्फ अपने परिवार का नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल का गौरव बन गई है और उसकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें हासिल करने का हौसला दे रही है।