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July 18, 2026
हिमाचल: बागवान की बेटी ने बिना कोचिंग NEET क्रैक कर रचा इतिहास: स्वयं अध्ययन-अनुशासन से पाया मुकाम
आर्युशी आष्टू ने पहले ही प्रयास में पास की नीट परीक्षा हासिल किए 540 अंक
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रामपुर बुशहर शिमला: कहते हैं कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, इरादे मजबूत हों और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर बुशहर की एक होनहार बेटी ने।
सीमित संसाधनों और बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद के बागवान की बेटी आर्युशी आष्टू ने नीट-यूजी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वय अध्ययन किसी भी सपने को साकार करने की ताकत रखते हैं।
आर्युशी की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया है। उनकी सफलता आज उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है जो महंगी कोचिंग के अभाव में अपने सपनों को अधूरा मान बैठते हैं।
रामपुर बुशहर उपमंडल की देवठी कूल पंचायत से संबंध रखने वाली आर्युशी आष्टू एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता रमेश आष्टू बागवानी से जुड़े हैं और मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पहाड़ों के बीच बसे गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। आर्युशी ने यह साबित कर दिया कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए केवल सुविधाएं ही नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार प्रयास भी जरूरी होते हैं।
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नीट-यूजी जैसी देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक में आर्युशी ने पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त की। उन्होंने 720 में से 540 अंक हासिल कर डॉक्टर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है और लगातार लोग उन्हें बधाइयां दे रहे हैं।
आर्युशी की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने अपनी तैयारी पूरी तरह स्वय अध्ययन, नियमित अभ्यास और समयबद्ध दिनचर्या के आधार पर की। आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लाखों रुपये की कोचिंग को सफलता की कुंजी माना जाता है, ऐसे समय में आर्युशी की उपलब्धि यह संदेश देती है कि सही दिशा में किया गया निरंतर प्रयास भी उतना ही प्रभावी हो सकता है।
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आर्युशी का मानना है कि किसी भी परीक्षा में सफलता पाने के लिए केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुशासित जीवनशैली भी बेहद जरूरी है। उन्होंने नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और लगातार अभ्यास को अपनी तैयारी का आधार बनाया। उनके अनुसार हर दिन तय लक्ष्य के साथ पढ़ाई करना और कमजोर विषयों पर लगातार काम करना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
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आर्युशी की प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय में हुई। इसके बाद छठी कक्षा में उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय में हुआ, जहां उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। विद्यालय के शिक्षकों का मार्गदर्शन और उनकी खुद की मेहनत ने उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार प्रदान किया। बारहवीं कक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का फैसला किया और उसी दिशा में पूरी लगन के साथ तैयारी शुरू कर दी।
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आर्युशी की सफलता आज रामपुर क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के उन छात्रों के लिए, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं, यह उपलब्धि एक मजबूत संदेश देती है कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है।
आर्युशी की इस उपलब्धि पर उनके माता-पिता, शिक्षकों और क्षेत्रवासियों ने खुशी व्यक्त की है। सभी ने विश्वास जताया कि वह भविष्य में एक सफल चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करेंगी और प्रदेश का नाम और अधिक रोशन करेंगी। उनकी सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर, महंगी कोचिंग या विशेष संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यदि सपने बड़े हों और उन्हें पूरा करने का जुनून हो, तो सफलता खुद रास्ता बना लेती है।