#उपलब्धि

July 1, 2026

हिमाचल: 32 डिग्रीयां हासिल कीं, अब 75 की उम्र में दी आचार्य की परीक्षा; युवाओं के लिए बने प्रेरणा

परीक्षा देने पहुंचे डॉ मिल्खी राम का हुआ जोरदार स्वागत, युवाआंे को दिया बड़ा संदेश

शेयर करें:

dr mikhi ram hamirpur

हमीरपुर। आज के दौर में जहां बड़ी संख्या में युवा मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और आभासी दुनिया में व्यस्त होकर किताबों से दूर होते जा रहे हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश के एक बुजुर्ग ने साबित कर दिया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है। 75 वर्षीय डॉ. मिल्खी राम की कहानी आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का ऐसा उदाहरण है, जो बताती है कि सफलता का रास्ता निरंतर सीखने और ज्ञान अर्जित करने से होकर गुजरता है।

 

हाल ही में हमीरपुर स्थित एक परीक्षा केंद्र में जब 75 वर्षीय डॉ. मिल्खी राम उच्च शिक्षा की परीक्षा देने पहुंचे, तो वहां मौजूद विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी उनके जज्बे को देखकर प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। जिस उम्र में अधिकांश लोग सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाकर आरामदायक जीवन व्यतीत करना पसंद करते हैं, उस उम्र में भी उनका शिक्षा के प्रति समर्पण बरकरार है।

शिक्षा को बनाया जीवन का मिशन

कांगड़ा जिले के एक ग्रामीण परिवेश से संबंध रखने वाले डॉ. मिल्खी राम ने अपने जीवन में शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविकास और समाज परिवर्तन का साधन माना। उन्होंने नौकरी, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच भी अध्ययन का क्रम कभी नहीं टूटने दिया। सरकारी सेवा में रहते हुए भी वे लगातार पढ़ाई करते रहे और सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका ज्ञान अर्जन का सफर नहीं रुका। यही कारण है कि आज उनके नाम अनेक शैक्षणिक उपलब्धियां दर्ज हैं और वे लगातार नई शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हैं।

 

यह भी पढ़ें : अतिक्रमण विवादों के बीच शमशेर नैहरिया बने धर्मशाला MC के मेयर, प्रेरणा बनी डिप्टी मेयर

32 डिग्रियों के साथ रचा अनोखा कीर्तिमान

डॉ. मिल्खी राम ने अपने जीवनकाल में विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक अनूठा उदाहरण पेश किया है। साहित्य, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, शिक्षा, कानून, प्रबंधन और पत्रकारिता जैसे विविध क्षेत्रों में उन्होंने अध्ययन किया है। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों की सूची इतनी लंबी है कि यह किसी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम जैसी प्रतीत होती है। अनेक स्नातक, स्नातकोत्तर, शोध और व्यावसायिक डिग्रियों के साथ उन्होंने यह साबित किया है कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में आज से लागू हुआ केंद्र का VB-G RAM G Act, बढ़ गई श्रमिकों की दिहाड़ी; जानें कितनी

नौकरी और पढ़ाई साथ-साथ

उनका जीवन संघर्ष और अनुशासन की मिसाल भी है। सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और जिम्मेदारियों के बावजूद स्वयं को लगातार शिक्षित करते रहे। यही निरंतरता उन्हें आज उस मुकाम तक लेकर आई है, जहां वे प्रदेशभर में प्रेरणा के स्रोत बन चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद जहां अधिकांश लोग अपने जीवन की उपलब्धियों पर संतुष्ट हो जाते हैं, वहीं डॉ. मिल्खी राम ने इसे नए सफर की शुरुआत माना और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहे।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल का बेटा बना भारतीय हैंडबॉल टीम का मुख्य कोच, एशियाई चैंपियनशिप में संभालेगा बड़ी जिम्मेदारी

युवाओं को दिया महत्वपूर्ण संदेश

डॉ. मिल्खी राम का मानना है कि शिक्षा व्यक्ति को केवल रोजगार नहीं देती, बल्कि उसे बेहतर इंसान भी बनाती है। उनका कहना है कि युवा वर्ग को नशे, समय की बर्बादी और नकारात्मक गतिविधियों से दूर रहकर अपने व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। वे युवाओं को सलाह देते हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, सीखने की प्रक्रिया कभी नहीं रुकनी चाहिए। निरंतर अध्ययन और आत्मविकास ही सफलता की असली कुंजी है।

डॉ. अंबेडकर से मिली प्रेरणा

डॉ. मिल्खी राम बताते हैं कि उन्हें भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण से विशेष प्रेरणा मिली। उनका मानना है कि शिक्षा समाज में समानता, जागरूकता और प्रगति का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अपनी उपलब्धियों का श्रेय परिवार के सहयोग और वर्षों की मेहनत को देते हुए कहा कि यदि परिवार का साथ और स्वयं पर विश्वास हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल हाईकोर्ट ने समझा पौंग विस्थापितों का दर्द, जमीन आबंटन पर श्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर तलब

परीक्षा केंद्र में हुआ जोरदार स्वागत

हमीरपुर में परीक्षा देने पहुंचे डॉ. मिल्खी राम वहां मौजूद विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए। उनकी उम्र और शिक्षा के प्रति उत्साह को देखकर कई युवा प्रेरित हुए। शिक्षकों ने भी उनके समर्पण की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए सकारात्मक संदेश बताया। इग्नू अध्ययन केंद्र हमीरपुर के प्रभारी प्रो संजय कुमार ने बताया कि 75 वर्ष की आयु में परीक्षा देने पहुंचे डॉ मिल्खी राम इस केंद्र के इतिहास में सबसे उम्रदराज परीक्षार्थी हैं। उनके इस अद्भुत उत्साह और शिक्षा के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें पुष्पगुच्छ देकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख