#उपलब्धि
July 20, 2026
हिमाचल की बेटी अर्शिता GOOGLE में करेगी नौकरी : मिला 60 लाख सालाना पैकेज
शानदार रहा अर्शिता का शैक्षणिक सफर
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश की बेटियां लगातार अपनी प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही हैं। इसी कड़ी में हमीरपुर जिले की नगर पंचायत भोटा की रहने वाली अर्शिता कानगो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनका चयन दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी Google में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर हुआ है। अर्शिता को लगभग 60 लाख रुपये वार्षिक पैकेज मिला है।
अर्शिता की शुरुआती शिक्षा भोटा स्थित एक निजी विद्यालय से हुई, जहां उन्होंने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने डीएवी पब्लिक स्कूल हमीरपुर से वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा पूरी की।
पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में विशेष रुचि दिखाई और उच्च शिक्षा के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर में प्रवेश लिया। वर्ष 2025 में उन्होंने एनआईटी हमीरपुर से बीटेक की डिग्री प्राप्त की। कॉलेज के दौरान उनकी मेहनत और तकनीकी दक्षता ने उन्हें कैंपस प्लेसमेंट में भी बेहतर अवसर दिलाए।
बीटेक पूरी करने के बाद अर्शिता का चयन वैश्विक वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर हुआ। उन्होंने वहां अपनी पेशेवर यात्रा शुरू की, लेकिन महज दो महीने के भीतर ही उन्होंने गूगल की कठिन चयन प्रक्रिया में सफलता हासिल कर ली।
कई चरणों वाली तकनीकी और इंटरव्यू प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार करने के बाद उनका चयन गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में हुआ। अब वह बेंगलुरु स्थित गूगल कार्यालय में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
अर्शिता की इस उपलब्धि से उनका परिवार बेहद खुश है। उनके पिता रवींद्र देव हमीरपुर डाकघर में प्रधान डाकपाल के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता कल्पना गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा और मेहनत का माहौल रहा है। उनकी बड़ी बहन भी डेंटल सर्जन के रूप में सेवाएं दे रही हैं।
परिजनों का कहना है कि अर्शिता बचपन से ही पढ़ाई के प्रति समर्पित थीं और हमेशा कुछ बड़ा करने का सपना देखती थीं। उनकी इस सफलता ने न केवल परिवार बल्कि पूरे हमीरपुर और हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन किया है।
अर्शिता कानगो की उपलब्धि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो तकनीकी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर मेहनत, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदारी से किए जाएं, तो दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों तक पहुंचना भी संभव है।