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July 18, 2026
हिमाचल: किसान की बेटी ने रचा नया इतिहास: रोज 14 घंटे पढ़ाई कर पास की NEET परीक्षा
सीमित संसाधनों के बावजूद NEET पास कर वंशिका ने पेश की मिसाल
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ठियोग (शिमला): हिमाचल प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। सीमित संसाधन, आर्थिक चुनौतियां और कठिन परिस्थितियां भी उनके हौसलों को रोक नहीं पा रही हैं। मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर प्रदेश की बेटियां लगातार सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी शिमला जिले के ठियोग क्षेत्र से सामने आई है, जहां एक किसान परिवार की बेटी वंशिका शर्मा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनने के अपने सपने को नई उड़ान दी है।
भराड़ा पंचायत के बलोआ गांव की रहने वाली वंशिका की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी मंजिल की राह में बाधा नहीं बन सकते।
ठियोग उपमंडल की भराड़ा पंचायत के बलोआ गांव की रहने वाली वंशिका शर्मा साधारण किसान परिवार से संबंध रखती हैं। गांव के शांत माहौल और सीमित सुविधाओं के बीच पली-बढ़ी वंशिका ने बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखा था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद समृद्ध नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने अपनी बेटी के सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। इसी विश्वास और मेहनत के दम पर वंशिका ने NEET परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है।
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वंशिका शुरू से ही मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा ठियोग के एक निजी विद्यालय से प्राप्त की और बाद में शिमला के राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर से मेडिकल संकाय में पढ़ाई की। बारहवीं कक्षा की परीक्षा में उन्होंने जिला स्तर पर प्रथम स्थान हासिल कर पहले ही अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें विभिन्न सरकारी और सामाजिक मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
वंशिका के सामने कई विकल्प मौजूद थे। उन्होंने नर्सिंग से जुड़ी प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षा में भी सफलता हासिल की और इंजीनियरिंग क्षेत्र की प्रतियोगी परीक्षा में भी अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बावजूद उनका लक्ष्य केवल एक था—एमबीबीएस कर डॉक्टर बनना। अपने इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने लगातार तैयारी जारी रखी। कठिन प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।
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NEET जैसी कठिन परीक्षा में सफलता के पीछे वंशिका की कड़ी मेहनत और अनुशासन सबसे बड़ी ताकत रही। उन्होंने लगातार दो वर्षों तक प्रतिदिन करीब 14 घंटे पढ़ाई की। तैयारी के दौरान कई बार निराशाजनक परिस्थितियां भी सामने आईं, लेकिन उन्होंने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने हर चुनौती का सामना किया और अंततः सफलता हासिल कर अपने सपनों को नई दिशा दी।
वंशिका की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का त्याग और समर्पण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके पिता संजय शर्मा खेती-बाड़ी से परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी मां कविता शर्मा एक निजी विद्यालय में शिक्षिका हैं। परिवार ने सीमित आय के बावजूद बच्चों की शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी। माता-पिता का कहना है कि बच्चों पर विश्वास और सही मार्गदर्शन किसी भी सपने को साकार करने की सबसे बड़ी कुंजी है।
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वंशिका की उपलब्धि अब उनके परिवार की अन्य बेटियों और क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली छात्राओं के लिए यह सफलता संदेश देती है कि मेहनत और लगन के सामने परिस्थितियां कभी बड़ी नहीं होतीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वंशिका ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगी सुविधाओं की मोहताज नहीं होती।
अपनी सफलता पर वंशिका का कहना है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनुशासन, समय प्रबंधन और निरंतर प्रयास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करने, समय का सदुपयोग करने और नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहने की सलाह दी। उनका मानना है कि बड़ी मंजिल तक पहुंचने के लिए संघर्ष भी बड़ा करना पड़ता है और जो विद्यार्थी धैर्य और मेहनत के साथ आगे बढ़ते हैं, सफलता अंततः उनके कदम चूमती है।
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वंशिका शर्मा की सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे और संघर्ष का प्रतीक है जो हिमाचल की बेटियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। किसान परिवार की यह बेटी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है और आने वाले समय में डॉक्टर बनकर समाज सेवा का अपना सपना पूरा करने की ओर बढ़ रही है।