ऊना। हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना अंब उपमंडल के सलोई गांव की गीता देवी ने साबित कर दिया है कि अगर कुछ सीखने का जुनून हो तो घर बैठे भी अपना हुनर निखारा जा सकता है। गीता देवी ने YouTube पर वीडियो देखकर हाथ से कलीरे बनाना सीखा और अब इसी काम से कमाई भी कर रही हैं। उनके बनाए कलीरे स्थानीय लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं और उन्हें अपनी पसंद के डिजाइन के लिए ऑर्डर भी मिल रहे हैं।

चार साल पहले वीडियो देखकर शुरू किया था सीखना

गीता देवी ने बताया कि करीब चार साल पहले उन्होंने YouTube वीडियो देखकर कलीरे बनाना सीखना शुरू किया था। शुरुआत में वह इसे सिर्फ एक शौक और हुनर के तौर पर सीख रही थीं। धीरे-धीरे जब उनके बनाए कलीरों को लोगों से अच्छी प्रतिक्रिया मिलने लगी तो उन्होंने इसे रोजगार से जोड़ने का फैसला किया।

 

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स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिला हौसला

इसी दौरान गीता देवी महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ गईं। समूह की महिलाओं ने उनके काम को पसंद किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। शुरुआत में उनके बनाए कलीरों की बिक्री समूह के माध्यम से हुई। इसके बाद आसपास के लोगों में भी उनके काम की पहचान बनने लगी।

नारियल के खोल से लेकर ऊन तक का करती हैं इस्तेमाल

कलीरे बनाने के लिए गीता देवी कई तरह की चीजों का इस्तेमाल करती हैं। इनमें नारियल के गोले, मखाने, फुलियां, ऊन से बने पॉपकॉर्न, डोरी, गोटा और शनील का कपड़ा शामिल है। कलीरे का डिजाइन और उसकी बारीकी जितनी ज्यादा होती है, उन्हें तैयार करने में उतना ही ज्यादा समय लगता है। एक जोड़ी कलीरे बनाने में करीब दो दिन से लेकर एक सप्ताह तक का समय लग जाता है।

 

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दुल्हनों के लिए तैयार करती हैं खास डिजाइन

गीता देवी सिर्फ साधारण कलीरे ही नहीं बनातीं, बल्कि दुल्हनों के लिए खास डिजाइन भी तैयार करती हैं। जयमाला के समय पहनाए जाने वाले विशेष कलीरे भी उनके पास ऑर्डर पर तैयार होते हैं। ग्राहक अपनी पसंद के डिजाइन के हिसाब से कलीरे बनवा सकते हैं।

डिजाइन के हिसाब से तय होती है कीमत

गीता देवी के अनुसार, चार नारियल गोलों वाले साधारण कलीरे करीब 300 से 500 रुपये की जोड़ी में बिकते हैं। वहीं जयमाला के लिए तैयार किए जाने वाले कलीरों की कीमत करीब 500 से 1000 रुपये तक होती है। उन्हें इनकी बिक्री पर लगभग 50 प्रतिशत तक मुनाफा हो जाता है।

 

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शादी के सीजन में बढ़ जाती है मांग

शादी के सीजन में कलीरों की मांग काफी बढ़ जाती है। इस दौरान गीता देवी हर महीने करीब 8 हजार रुपये तक की कमाई कर लेती हैं। खास बात यह है कि शादी का सीजन शुरू होने से पहले ही उन्हें कलीरों के ऑर्डर मिलने लगते हैं।

अब दूसरे हस्तनिर्मित सामान बनाने की तैयारी

गीता देवी का कहना है कि घर से काम करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वह अपनी सुविधा के अनुसार समय निकाल पाती हैं। अब उनका लक्ष्य कलीरों के साथ-साथ दूसरे हस्तनिर्मित सामान भी तैयार करना है, ताकि वह अपने इस काम को आगे और बढ़ा सकें।