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August 31, 2026

हिमाचल : फौजी के बेटे मयंक ने बिना कोचिंग NEET में मारी बाजी, MBBS के लिए हुआ चयन

कोचिंग छोड़कर खुद पढ़ाई पर किया भरोसा

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NEET 2026 Mayank Sharma

सिरमौर। बड़े शहरों की चकाचौंध और महंगी कोचिंग से दूर एक छोटे से गांव में पढ़ाई कर मयंक शर्मा ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर आज पूरा क्षेत्र गर्व कर रहा है। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की तहसील शिलाई के बम्बल गांव के रहने वाले मयंक ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान की मदद के NEET-2026 परीक्षा पास कर ली है।

 

अपनी मेहनत और खुद की तैयारी के दम पर उन्होंने नाहन मेडिकल कॉलेज में MBBS में प्रवेश हासिल किया है। मयंक की यह सफलता उन तमाम विद्यार्थियों के लिए मिसाल है, जो सीमित सुविधाओं के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

कोचिंग छोड़कर खुद पढ़ाई पर किया भरोसा

मयंक ने NEET की तैयारी के लिए किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने घर पर रहकर खुद पढ़ाई की और अपनी तैयारी पर पूरा भरोसा रखा। उन्होंने रोजाना पढ़ाई के लिए समय तय किया और उसी के अनुसार तैयारी करते रहे। लगातार मेहनत, समय का सही इस्तेमाल और अनुशासन के साथ उन्होंने NEET जैसी कठिन परीक्षा को पास करने का अपना सपना पूरा किया।

 

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मेहनत और सही तैयारी बनी सफलता की वजह

मयंक की सफलता इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने सीमित सुविधाओं के बावजूद यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने साबित किया कि अगर पढ़ाई का सही तरीका पता हो और मेहनत लगातार जारी रखी जाए तो बिना महंगी कोचिंग के भी प्रतियोगी परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है। उनकी सफलता उन बच्चों के लिए भी मिसाल है, जो सुविधाओं की कमी के कारण अपने बड़े सपनों को पूरा करने से डरते हैं।

रिटायर्ड फौजी पिता से मिला अनुशासन

मयंक शर्मा प्रताप शर्मा और माता तारा शर्मा के बेटे हैं। उनके पिता भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। मयंक का कहना है कि पिता से मिले अनुशासन और परिवार के लगातार सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत दी। उनकी बड़ी बहन भी M.Sc. की पढ़ाई कर रही हैं। परिवार में पढ़ाई को लेकर हमेशा अच्छा माहौल रहा, जिसका फायदा मयंक को भी मिला।

 

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मामा ने पढ़ाई में दिखाई सही राह

मयंक अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने मामा रामस्वरूप शर्मा को भी देते हैं। रामस्वरूप शर्मा गुदी गांव के रहने वाले हैं और TGT साइंस के पद पर कार्यरत हैं। मयंक ने बताया कि उनके मामा ने पढ़ाई के दौरान उन्हें सही दिशा दिखाई। उन्होंने समय-समय पर मयंक का हौसला बढ़ाया और लगातार मेहनत करते रहने के लिए प्रेरित किया।

मयंक ने छात्रों को दिया मेहनत का संदेश

मयंक का कहना है कि NEET जैसी परीक्षा पास करने के लिए लगातार मेहनत करना, सही दिशा में पढ़ाई करना, समय का सही इस्तेमाल करना और खुद पर विश्वास रखना बहुत जरूरी है। उनका कहना है कि अगर कोई विद्यार्थी अपने लक्ष्य को लेकर ईमानदार है और लगातार मेहनत करता है तो मुश्किल परिस्थितियां भी उसकी सफलता को नहीं रोक सकतीं।

 

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गिरिपार क्षेत्र के लिए गर्व की बात

बम्बल जैसे दूरदराज गांव से निकलकर नाहन मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए चयन हासिल करना मयंक की मेहनत और लगन का नतीजा है। उनकी इस सफलता से परिवार के साथ-साथ रिश्तेदारों, शिक्षकों और पूरे गिरिपार क्षेत्र में खुशी का माहौल है। बिना कोचिंग के सिर्फ अपनी मेहनत और स्वअध्ययन के दम पर NEET पास कर मयंक ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो गांव में रहकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

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