#उपलब्धि
August 30, 2026
हिमाचल की बेटी को सलाम: आखों की रोशनी गई, मगर नहीं मानी हार- 77 KM दौड़कर रचा इतिहास
77 KM की हाई एल्टीट्यूड मैराथन पूरी कर रचा इतिहास
शेयर करें:

रिकांगपिओ। कहते हैं कि अगर हौसला मजबूत हो तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर के दुर्गम चांगों गांव की अंगमो नेगी ने एक बार फिर इस बात को साबित कर दिया है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद उन्होंने स्पीति घाटी में आयोजित 77 किलोमीटर लंबी हाई एल्टीट्यूड मैराथन पूरी कर ली।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला पर्वतारोही बनने के बाद अंगमो की यह उपलब्धि उनके साहस की एक और मिसाल बन गई है। भारतीय सेना ने भी उनकी इस कामयाबी के लिए उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया।
यह भी पढ़ें : पिता नहीं रहे तो मां बनी सहारा, रीटा ने मेहनत के दम पर पास की UGC NET-JRF परीक्षा
भारतीय सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत 28 अगस्त को कुंजुम टॉप से काजा तक सूर्य स्पीति चैलेंज मैराथन का आयोजन किया था। हजारों फीट की ऊंचाई पर हुई इस दौड़ में प्रतिभागियों को आसान रास्ता नहीं मिला। पथरीले ट्रैक, खड़ी चढ़ाइयां, बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और बर्फीले तूफान जैसी चुनौतियां रास्ते में थीं।
इन मुश्किल हालात के बीच अंगमो नेगी ने 77 किलोमीटर की दूरी पूरी कर दिखाई कि उनकी दृष्टिबाधितता उनके हौसले के सामने रुकावट नहीं बन सकती।
यह भी पढ़ें : आउटसोर्स कर्मियों के आएंगे अच्छे दिन! CM सुक्खू लाने जा रहे ठोस नीति, लॉटरी को बताया भाग्य
अंगमो नेगी इससे पहले भी इतिहास रच चुकी हैं। 28 साल की उम्र में उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई की थी, जिसके साथ वह भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला पर्वतारोही बनीं। अब स्पीति की ऊंचाइयों में 77 किलोमीटर की मैराथन पूरी कर उन्होंने अपने नाम एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में आधी रात को दरकी पहाड़ी- जोरदार धमाके से सहमे ग्रामीण, घर छोड़ भागे
मैराथन पूरी करने के बाद भारतीय सेना की ओर से अंगमो नेगी को विशेष सम्मान दिया गया। उनकी उपलब्धि ने मैराथन में हिस्सा लेने वाले अन्य प्रतिभागियों और स्थानीय लोगों का भी उत्साह बढ़ाया।
इस प्रतियोगिता में कुल 1,532 धावकों ने हिस्सा लिया। इनमें करीब 800 स्थानीय प्रतिभागी, 700 सेना के जवान और देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे 32 एलीट रनर शामिल थे।