सोलन। हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। प्रदेश की सुक्खू सरकार पर भी अवैध खनन पर रोक ना लगा पाने के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन अब अवैध खनन पर सुक्खू सरकार सख्त होती दिख रही है और सख्त कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में अवैध खनन करने वालो के खिलाफ कार्रवाई का तरीका पूरी तरह से बदलने जा रहा है। अवैध खनन पर अब जमीन से अधिक आसमान से नजर रखी जाएगी। यानी अब पुलिस से पहले ड्रोन अवैध खनन करने वालों तक पहुंच जाएंगे।

नाइट विजन ड्रोन करेंगे निगरानी

दरअसल सुक्खू सरकार हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन के खिलाफ अपनी कार्रवाई का तरीका पूरी तरह बदलने जा रही है। रात के अंधेरे में नदियों और पहाड़ियों को छलनी करने वाले खनन माफिया पर अब आसमान से नजर रखी जाएगी। जिला सोलन में अत्याधुनिक नाइट विजन ड्रोन के जरिए अवैध खनन पर लगाम कसने की नई रणनीति पर काम शुरू हो गया है। प्रशासन का दावा है कि अब पुलिस या टीम के पहुंचने से पहले ही ड्रोन मौके पर पहुंच जाएंगे और माफिया की गतिविधियां रिकॉर्ड हो जाएंगी।

 

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अब तक खनन माफिया दुर्गम इलाकों, नदी-नालों और कच्चे रास्तों का फायदा उठाकर रात में खनन करता था, जहां न तो गश्ती दल आसानी से पहुंच पाते थे और न ही समय पर कार्रवाई संभव हो पाती थी। लेकिन नाइट विजन ड्रोन के आने से यह खेल अब ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा। अंधेरे में भी साफ तस्वीरें देने वाले ये ड्रोन दूर.दराज क्षेत्रों में हो रही हर हलचल पर नजर रखेंगे।

नदियों का सीना अब नहीं होगा छलनी

अवैध खनन से प्रदेश की नदियों, पर्यावरण और पहाड़ियों को भारी नुकसान हो रहा था। खासकर नदी तटों से अवैध रूप से रेत और बजरी निकालने के कारण जलस्तर, पारिस्थितिकी और आसपास के गांवों पर खतरा बढ़ता जा रहा था। प्रशासन का कहना है कि ड्रोन निगरानी शुरू होने के बाद हिमाचल की नदियों का सीना अब यूं ही छलनी नहीं होने दिया जाएगा।

 

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रियल टाइम एक्शन की तैयारी

नाइट विजन ड्रोन से मिलने वाली लाइव फीड के आधार पर कंट्रोल रूम से सीधी निगरानी की जाएगी। जैसे ही किसी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होगी, संबंधित टीम और फ्लाइंग स्क्वाड को तुरंत अलर्ट किया जाएगा। इससे मौके पर तेजी से पहुंचकर कार्रवाई संभव होगी और सबूत भी पुख्ता रहेंगे।

ट्रायल के बाद स्थायी व्यवस्था

फिलहाल इस तकनीक को ट्रायल के तौर पर आजमाया जा रहा है। शुरुआती संकेत सकारात्मक मिलने पर ड्रोन संचालन को लेकर एमओयू किया जाएगा और संवेदनशील क्षेत्रों में इसे नियमित रूप से तैनात किया जाएगा। प्रशासन का फोकस उन इलाकों पर रहेगा, जहां पहले अवैध खनन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

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माफिया के गढ़ रहे निशाने पर

नालागढ़, बरोटीवाला, दाड़लाघाट और आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन की घटनाएं लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। पहाड़ी ढलानों और नदी.नालों में सक्रिय खनन माफिया अब प्रशासन की सीधी निगरानी में होगा। जिला खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन तकनीक का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं, बल्कि अवैध खनन को जड़ से खत्म करना है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होगा।

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कुल मिलाकर, हिमाचल में अब अवैध खनन के खिलाफ जंग जमीन से नहीं, बल्कि आसमान से लड़ी जाएगी। ड्रोन की आंखों के आगे माफिया की एक भी चाल छिपी नहीं रह पाएगी और प्रदेश की नदियों व पहाड़ों को नई सुरक्षा मिलेगी।

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