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January 4, 2026
धर्मशाला छात्रा मौ*त मामला: CM सुक्खू ने टूटे परिवार को दिया सहारा, फोन पर की बात- पिता ने मांगी मदद
मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर आगे बढ़ेगी जांच
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा स्थित धर्मशाला कॉलेज की छात्रा की मौत के मामले ने प्रदेश भर में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रदेश सरकार और प्रशासन ने सक्रियता और बढ़ा दी है। CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार रात पीड़ित परिवार से फोन पर बातचीत कर संवेदना जताई और निष्पक्ष जांच व न्याय का भरोसा दिलाया। वहीं पुलिस ने जांच के दायरे को और विस्तृत करते हुए मृतका के परिजनों को भी जांच प्रक्रिया में शामिल कर लिया है।
कैबिनेट मंत्री यादविंदर गोमा धर्मशाला पहुंचकर मृतका के परिजनों से मिले। इस दौरान मंत्री गोमा ने CM से पीड़ित परिवार की फोन पर बातचीत करवाई। मुख्यमंत्री ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है और मामले की गहन जांच कराई जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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मंत्री यादविंदर गोमा ने परिजनों को आश्वस्त किया कि सरकार इस प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रशासन को जांच में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा, धर्मशाला के पुलिस अधीक्षक अशोक रतन और कांग्रेस नेता दविंदर जग्गी भी मौजूद रहे।
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पुलिस ने मामले की जांच को और मजबूत करते हुए मृतका के परिजनों को भी जांच में शामिल कर लिया है। पुलिस टीम ने छात्रा के घर पर सर्च कर कुछ अहम दस्तावेज और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। साथ ही, जिन अस्पतालों में छात्रा का इलाज हुआ था, वहां से उसकी मेडिकल हिस्ट्री जुटाई जा रही है।
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कांगड़ा के एएसपी वीर बहादुर ने बताया कि मेडिकल हिस्ट्री मिलने के बाद मेडिकल ऑफिसर और मेडिकल बोर्ड की राय के आधार पर ही पुलिस किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर पर लगे आरोपों को लेकर लगातार पूछताछ की जा रही है और जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है।
जानकारी के अनुसार, 26 दिसंबर 2025 को धर्मशाला कॉलेज की 19 वर्षीय छात्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि कॉलेज की तीन छात्राओं द्वारा रैगिंग, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की गई। इसके साथ ही कॉलेज के एक प्रोफेसर पर अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
पुलिस ने एक प्रोफेसर और तीन छात्राओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। प्रोफेसर को सरकार द्वारा निलंबित कर दिया गया है, जबकि मामले की जांच के लिए हाई-लेवल कमेटी का गठन किया गया है। फिलहाल जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं अब इस प्रकरण में आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी चुप्पी तोड़ी है। दो बेटियों के पिता होने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो वे हर सजा भुगतने को तैयार हैं। उनका दावा है कि निष्पक्ष जांच ही इस मामले में सच्चाई को सामने ला सकती है।
मीडिया से बातचीत में प्रोफेसर अशोक कुमार ने भावुक लहजे में कहा कि उनकी भी दो बेटियां हैं और वे इस मामले को एक पिता के नजरिये से समझते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि दिवंगत छात्रा को न्याय मिल सके और सच्चाई सामने आए।
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अपने ऊपर लगे गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक कुमार ने कहा कि यदि कॉलेज परिसर में छात्रा के साथ किसी तरह की गलत घटना हुई होती, तो इसकी शिकायत कॉलेज प्रशासन या एंटी.रैगिंग कमेटी के समक्ष दर्ज होनी चाहिए थी। उनके अनुसार अब तक रिकॉर्ड में ऐसी कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां हर पहलू से जांच करें, ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे।
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सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा किए गए निलंबन पर पूछे गए सवाल के जवाब में आरोपी प्रोफेसर ने प्रशासन के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि निलंबन से जांच प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी और यह कदम पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी है। उनका कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।