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June 2, 2026
बड़ी खुशखबरी...सिर्फ 40 रुपये में पहुंच सकते हैं हिमाचल- टाइम की भी होगी बचत, जानें
चार साल बाद फिर गूंजी छोटी रेल की सीटी, जनता खुश
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कांगड़ा। लंबे इंतजार के बाद आखिर वह दिन आ ही गया, जिसका हिमाचल और पंजाब के हजारों यात्रियों को बेसब्री से इंतजार था। करीब पौने चार साल तक बंद रहने के बाद पठानकोट-जोगिंदरनगर नैरोगेज रेल सेवा दोबारा पटरी पर लौट आई है।
ट्रेन के पहियों की आवाज और स्टेशन पर गूंजती सीटी ने न केवल यात्रियों को राहत दी है। इसने उन लोगों की पुरानी यादें भी ताजा कर दी हैं- जो वर्षों से इस रेल मार्ग से जुड़े रहे हैं।
रेल सेवा शुरू होने के पहले ही दिन यात्रियों में खासा उत्साह देखने को मिला। सुबह ट्रेन में सफर करने वाले लोगों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। कई यात्रियों ने कहा कि अब उन्हें कम खर्च में आरामदायक यात्रा का विकल्प मिल गया है। खासकर जोगिंदरनगर, बैजनाथ, पालमपुर और कांगड़ा क्षेत्र के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
यात्रियों का कहना है कि इस रेल सेवा के दोबारा शुरू होने से उनकी यात्रा लागत में बड़ी कमी आएगी। जहां पहले जोगिंदरनगर तक बस से जाने के लिए लगभग 392 रुपये खर्च करने पड़ते थे। वहीं अब ट्रेन से वही सफर करीब 40 रुपये में पूरा किया जा सकेगा। इसी तरह अन्य स्टेशनों तक भी ट्रेन का किराया बसों की तुलना में काफी कम है।
पहले दिन ट्रेन में करीब 60 यात्रियों ने सफर किया। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ेगी और यह रेल सेवा फिर से क्षेत्र की जीवनरेखा साबित होगी।
रेल सेवा बहाल होने के साथ ही मंगलवार सुबह पठानकोट से सात कोचों वाली दो ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया। पहली ट्रेन सुबह 5 बजे रवाना हुई, जबकि दूसरी ट्रेन ने सुबह 7 बजे अपने सफर की शुरुआत की। दोनों ट्रेनों को बैजनाथ की ओर भेजा गया।
हिमाचल प्रदेश की ओर से भी रेल संचालन निर्धारित समयानुसार शुरू किया गया। कांगड़ा रेलवे स्टेशन से सुबह साढ़े आठ बजे से ट्रेनों की आवाजाही शुरू हुई- जिससे स्थानीय यात्रियों को भी बड़ी राहत मिली।
रेल सेवा की बहाली को ऐतिहासिक उपलब्धि मानते हुए कांगड़ा रेलवे स्टेशन पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सांसद अनुराग ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज और विधायक पवन कुमार काजल ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह रेल मार्ग केवल एक परिवहन सुविधा नहीं है, बल्कि हिमाचल और पंजाब के लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसके दोबारा शुरू होने से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आवागमन को भी नया बल मिलेगा।
इस रेलखंड को फिर से शुरू करने के लिए रेलवे को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। क्षतिग्रस्त चक्की रेलवे पुल की जगह नया आधुनिक पुल तैयार किया गया है। रेल मंत्रालय ने इस परियोजना पर लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
पुल निर्माण पूरा होने के बाद रेलवे अधिकारियों ने ट्रैक का विस्तृत निरीक्षण किया। सुरक्षा मानकों की जांच की गई और कई ट्रायल रन सफलतापूर्वक संचालित किए गए। सभी परीक्षणों में मार्ग सुरक्षित पाए जाने के बाद नियमित रेल सेवा बहाल करने का फैसला लिया गया।
विदित रहे कि, अगस्त 2023 में आई भीषण बाढ़ ने इस ऐतिहासिक रेल मार्ग को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। पंजाब और हिमाचल की सीमा पर स्थित चक्की रेलवे पुल का बड़ा हिस्सा तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल टूटने के कारण पूरे रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन बंद करना पड़ा था।
उस समय हजारों यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ा। क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों की लगातार मांग के बाद रेल मंत्रालय ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए नए पुल के निर्माण का कार्य शुरू कराया था।
ट्रेन संख्या 62465- सुबह 5:00 बजे
ट्रेन संख्या 52467- सुबह 7:00 बजे
पहली ट्रेन- दोपहर 2:15 बजे
दूसरी ट्रेन- दोपहर 3:45 बजे
रेल सेवा की सबसे बड़ी विशेषता इसका किफायती किराया है। जहां बस यात्रा पर यात्रियों को अधिक राशि खर्च करनी पड़ती है, वहीं ट्रेन से बेहद कम किराए में यात्रा संभव होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेल सेवा की बहाली केवल यात्रियों के लिए राहत नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन उद्योग को भी नई गति मिलेगी। कांगड़ा घाटी की खूबसूरत वादियों से गुजरने वाली यह नैरोगेज रेल पर्यटकों के बीच हमेशा आकर्षण का केंद्र रही है।
अब दोबारा ट्रेनों के संचालन से स्थानीय कारोबार, होटल उद्योग और छोटे व्यापारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। करीब चार वर्षों की खामोशी के बाद जब छोटी रेल फिर से पटरी पर दौड़ी तो यह केवल एक परिवहन सेवा की वापसी नहीं थी, बल्कि हजारों लोगों की उम्मीदों, यादों और जरूरतों की भी वापसी थी।