शिमला। स्ट्रोक एक ऐसी मेडिकल समस्या है जिसमें ब्रेन के एक हिस्से में रक्त प्रवाह अचानक बाधित हो जाता है। ऐसे में ब्रेन की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं, जिससे वे मरने लगती हैं और ब्रेन को स्थायी नुकसान हो सकता है। हिमाचल में भी कई लोग इस समस्या के शिकार होते हैं। वहीं अब कुछ जोखिम भरे कारकों के चलते युवाओं व मध्यम आयु वर्ग के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
युवा में भी हो रही स्ट्रोक की समस्या
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी व अनियंत्रित दिनचर्या के कारण स्ट्रोक के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हो रही है। गौर करने वाली बात है कि अब ये गंभीर समस्या सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही बल्कि युवा भी इसके शिकार हो रहे हैं।
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साल में 300 से 400 मरीज होते भर्ती
उच्च रक्तचाप, मधुमेह यानी शुगर व तंबाकू के सेवन से युवाओं व मध्यम आयु वर्ग के लोग भी स्ट्रोक की समस्या झेल रहे हैं। IGMC के आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 300 से 400 मरीज इलाज के लिए भर्ती होते हैं।
64% पुरुष हुए हैं स्ट्रोक के शिकार
2021 से 2024 के बीच का डेटा बताता है कि भर्ती होने वाले मरीजों में 61 साल से ज्यादा उम्र के लोग प्रमुख थे। लिंग के आधार पर 64% पुरुष और 36% महिलाएं स्ट्रोक का शिकार हुईं।
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हिमाचल में HP टेलीस्ट्रोक अभियान
हिमाचल में स्ट्रोक की जागरूकता के लिए HP टेलीस्ट्रोक अभियान चल रहा है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाना है जिसमें स्वस्थ खान-पान और बीपी-शुगर को नियंत्रण में रखना शामिल है।
दिमाग की रक्त वाहिकाओं में रुकावट
इस्केमिल स्ट्रोक सबसे आम प्रकार है जिसमें दिमाग की नस में थक्का जम जाता है। दिमाग की रक्त वाहिकाओं में रुकावट आ जाती है जिससे शरीर के प्रभावित अंग काम करना बंद कर देते हैं।
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ज्यादा खतरनाक दिमाग की नस फटना
रक्तस्रावी स्ट्रोक में दिमाग की नस फट जाती है जो ज्यादा गंभीर स्थिति है। रक्त वाहिका फटने से दिमाग में रक्तस्राव होता है और इंसान बेहोश हो सकता है। स्ट्रोक कई वजहों से हो सकता है जैसे-
- धूम्रपान
- अत्यधिक शराब का सेवन
- अनियंत्रित रक्तचाप और शुगर
- उच्च कोलेस्ट्रॉल
- दिल की धड़कन का अनियमित होना
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स्ट्रोक में तुरंत एक्शन लेना है जरूरी
कहा जाता है कि स्ट्रोक जैसी मेडिकल इमरजेंसी में समय ही उपचार है। स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर एकदम एक्शन लेना जरूरी है। इसके प्रमुख प्रारंभिक संकेत कुछ इस प्रकार हैं-
- अचानक चेहरे का टेढ़ा हो जाना
- बोलने या समझने में कठिनाई होना
- शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन
- आंखों में धुंधलापन या एक आंख से देखने में परेशानी
- तेज सिरदर्द, उल्टी या अचानक चक्कर आना या चलने में दिक्कत
साढ़े चार घंटों में ले जाएं अस्पताल
डॉक्टर कहते हैं कि स्ट्रोक के मरीज को साढ़े चार घंटों के अंदर ऐसे अस्पताल ले जाना आवश्यक है जहां सीटी स्कैन की सुविधा है। इस गोल्डन आवर में दी जाने वाली फ्सर्ट ऐड, रक्त पतला करने वाला इंजेक्शन देने से खून के प्रवाह को नॉर्मल किया जा सकता है।
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स्ट्रोक में घरेलू नुस्खों से करें परहेज
डॉक्टर कहते हैं कि ऐसा करने से मरीज के पूरी तरह से ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही में डॉक्टर सख्त चेतावनी भी देते हैं कि इस समस्या में कोई घरेलू नुस्खे या देरी करने वाले इलाज से बचना चाहिए।
ठंड में स्ट्रोक के मरीज इन चीजों का ध्यान रखें-
- पर्याप्त ऊनी कपड़े पहनें
- नियमित रूप से गुनगुना पानी पीएं
- बिस्तर से सीधे उठकर बाहर सैर पर जाने से बचें
- डॉक्टर की सलाह पर नियमित दवाएं लें व व्यायाम करें
- तनाव, धूम्रपान, शराब व ज्यादा तेल वाले खाने से दूर रहें
