शिमला। हिमाचल प्रदेश में संपत्ति स्वामित्व से संबंधित एक ऐतिहासिक संशोधन हुआ है। प्रदेश की सरकार ने बेटियों को अधिक भूमि स्वामित्व का अधिकार देने के लिए संशोधित लैंड सीलिंग बिल को विधानसभा में पारित किया था, जिसे अब राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। यह बिल राज्य की बेटियों को 300 कनाल तक भूमि का स्वामित्व देने का प्रावधान करता है, जिससे उनके संपत्ति अधिकारों में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।
अब बेटियों को भी मिलेगा भूमि का हक
संशोधित लैंड सीलिंग बिल के अनुसार, अब हिमाचल प्रदेश की बेटियां भी अपने परिवार के लिए 300 कनाल तक भूमि रख सकती हैं। पहले, बेटों को एक अलग इकाई मानकर अधिक भूमि का अधिकार मिलता था, जबकि बेटियों को यह अधिकार नहीं था। अब दोनों को समान अधिकार मिलेंगे। यह कदम सुक्खू सरकार द्वारा राज्य में महिलाओं के संपत्ति अधिकार को समान बनाने के लिए उठाया गया है।
यहां समझिए नए संशोधन से क्या होगा लाभ
1972 का कानून (पूर्व स्थिति):
1. भूमि स्वामित्व की सीमा:
1972 के हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा एक्ट के तहत, एक परिवार के पास अधिकतम 300 कनाल (150 बीघा) तक भूमि रखने का अधिकार था, जिसमें पति-पत्नी और बच्चों को शामिल किया जाता था।
2. बेटों को एक इकाई माना जाता था:
इस कानून के अनुसार, परिवार के व्यस्क बेटे को एक अलग इकाई माना जाता था, जिससे उसे अतिरिक्त भूमि का अधिकार मिलता था।
3. बेटियों को भूमि स्वामित्व का अधिकार नहीं था:
इस कानून में बेटियों को भूमि स्वामित्व के लिए एक इकाई मानने का प्रावधान नहीं था। बेटियों को संपत्ति पर अधिकार नहीं था, जबकि बेटों को अधिक भूमि का अधिकार मिलता था।
4. सरकार के पास अधिक भूमि:
300 कनाल से अधिक भूमि रखने के मामले में, अतिरिक्त भूमि सरकार के पास निहित की जाती थी।
5. उद्योगों और विद्युत परियोजनाओं के लिए छूट:
पहले, उद्योगों और विद्युत परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए 150 बीघा (300 कनाल) से अधिक भूमि रखने की छूट दी जाती थी।
नया संशोधन (वर्तमान स्थिति):
1. बेटियों को भूमि स्वामित्व का अधिकार:
अब संशोधित कानून में बेटियों को भी भूमि स्वामित्व का अधिकार दिया गया है। बेटियों को एक इकाई माना जाएगा, जिससे वे भी 300 कनाल तक भूमि रख सकती हैं।
2. विवाहित और अविवाहित बेटियों को समान अधिकार:
संशोधन के बाद, अब विवाहित और अविवाहित दोनों बेटियों को भूमि स्वामित्व के अधिकार की गणना के लिए एक इकाई माना जाएगा, जिससे महिलाओं के संपत्ति अधिकारों में समानता आएगी।
3. समान भूमि स्वामित्व:
अब बेटों और बेटियों को समान अधिकार मिलने से परिवारों में संपत्ति स्वामित्व की समानता सुनिश्चित होगी। बेटों के मुकाबले बेटियों को भी भूमि स्वामित्व का अधिकार मिलेगा।
4. 600 कनाल तक भूमि रखने की सीमा:
परिवार को अधिकतम 600 कनाल तक भूमि रखने की छूट मिलेगी, लेकिन 300 कनाल से अधिक भूमि रखने का अधिकार केवल एक इकाई के रूप में ही रहेगा।
5. सरकार के पास अतिरिक्त भूमि:
300 कनाल से अधिक भूमि रखने पर वह भूमि सरकार के पास निहित की जाएगी, जिससे अत्यधिक भूमि संचय पर नियंत्रण रहेगा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
6. सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए छूट:
संशोधित बिल में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भी भूमि सीमा से छूट दी गई है, लेकिन यह छूट केवल सरकारी कंपनियों या सरकारी उपकरणों को मिलेगी।
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1972 के कानून में संशोधन
वर्ष 1972 का हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा एक्ट, जो भूमि स्वामित्व की अधिकतम सीमा निर्धारित करता है, अब संशोधित किया गया है। इसके तहत किसी भी परिवार के पास 300 कनाल तक जमीन रखने का हक था, जिसमें पति-पत्नी और बच्चे शामिल होते थे। अब इसमें बेटियों को भी एक इकाई माना जाएगा, जिससे उन्हें भी भूमि स्वामित्व का अधिकार मिलेगा। इसके अलावा, इस संशोधन से परिवारों को भूमि स्वामित्व में समानता मिलेगी, जो पहले केवल बेटों के पक्ष में था।
विवाहित और अविवाहित बेटियों को मिलेगा अधिकार
संशोधन के बाद, अब विवाहित और अविवाहित बेटियों को भूमि की सीमा की गणना के लिए अलग-अलग इकाइयां माना जाएगा। पहले केवल बेटों को ही एक इकाई माना जाता था, लेकिन अब बेटियों को भी उनका हक मिलेगा। यह कदम महिलाओं को भूमि अधिकारों में समानता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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600 कनाल तक भूमि रखने की सीमा
नए संशोधन के अनुसार, एक परिवार में अगर एक व्यस्क बेटा है तो उसे 300 कनाल भूमि का स्वामित्व मिल सकता है। लेकिन, अगर परिवार में दो या दो से अधिक बेटे हैं, तो फिर भी परिवार को अधिकतम 300 कनाल भूमि का अधिकार होगा। यही प्रावधान बेटियों के लिए भी लागू होगा। हालांकि, परिवारों को 600 कनाल तक भूमि रखने की छूट मिलेगी, लेकिन 300 कनाल से अधिक भूमि रखने का अधिकार सिर्फ एक यूनिट के रूप में ही रहेगा।
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सरकार के पास होगी अतिरिक्त भूमि
संशोधित बिल के तहत, अगर कोई परिवार 300 कनाल से अधिक भूमि रखता है, तो अतिरिक्त भूमि सरकार के पास निहित की जाएगी। इस कदम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भूमि का अत्यधिक संचय न हो और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
उद्योगों और विद्युत परियोजनाओं के लिए छूट
संशोधित लैंड सीलिंग बिल में उद्योगों और विद्युत परियोजनाओं को भूमि सीमा से छूट दी गई है। पहले 150 बीघा (300 कनाल) से ज्यादा भूमि रखने की छूट दी जाती थी, लेकिन अब सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए भी लैंड सीलिंग में छूट दी गई है। हालांकि, इस छूट का लाभ केवल सरकारी कंपनियों या सरकारी उपकरणों को ही मिलेगा। यह कदम सुक्खू सरकार के सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए है।
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सुक्खू सरकार का यह बड़ा कदम
यह बिल हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाने और भूमि स्वामित्व में समानता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। सुक्खू सरकार का यह कदम राज्य में सशक्त महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर हो सकता है।
