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March 15, 2026

अब मुफ्त नहीं होगा स्कूल का सफर: हिमाचल में छात्र बस पास के नाम पर वसूले जाएंगे करोड़ों रुपये

मुफ्त सफर के लिए 'हिम बस पास' अनिवार्य

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Himachal News

शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर है। प्रदेश सरकार की नई व्यवस्था के अनुसार अब स्कूलों में मिलने वाली पूरी तरह 'निशुल्क' बस सेवा का स्वरूप बदलने जा रहा है। 1 अप्रैल से विद्यार्थियों को बस में मुफ्त सफर करने के लिए जेब ढीली करनी होगी।

मुफ्त सफर के लिए 'हिम बस पास' अनिवार्य

अब तक सरकारी स्कूलों के छात्र अपने स्कूल आईडी कार्ड या साधारण प्रक्रिया से मुफ्त यात्रा करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था के तहत:

  • विद्यार्थियों को 236 रुपये खर्च कर 'हिम बस पास' बनवाना अनिवार्य होगा।
  • बिना इस पास के किसी भी विद्यार्थी को मुफ्त यात्रा की सुविधा नहीं मिलेगी।

पास बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा जिसके लिए लोकमित्र केंद्र पर 40 रुपये अतिरिक्त फीस देनी होगी। यानी एक छात्र पर करीब 276 रुपये का तत्काल बोझ पड़ेगा।

 

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लाखों विद्यार्थियों पर पड़ेगा असर

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 8.50 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से एक बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों से बस के जरिए स्कूल पहुंचते हैं। 31 मार्च के बाद जिन छात्रों के पास ये 'हिम बस पास' नहीं होगा, उन्हें बस का किराया देना पड़ेगा।

गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ

हिमाचल सरकार दशकों से गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को मुफ्त परिवहन और वर्दी जैसी सुविधाएं देकर शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करती आई हैललेकिन अब HRTC को घाटे से उबारने के लिए उठाए गए इस कदम की तीखी आलोचना हो रही है। अभिभावकों का तर्क है कि:

  • ऑनलाइन सुविधा के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये की वसूली की तैयारी कर रही है।
  • जो गरीब परिवार इस राशि का भुगतान नहीं कर पाएंगे, उनके बच्चों को या तो पढ़ाई छोड़नी होगी या कई किलोमीटर पैदल चलना होगा।

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पुरानी बनाम नई व्यवस्था

पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था (1 अप्रैल से) 

  • बस पास पूरी तरह निशुल्क थे | बस पास के लिए 236 रुपये देने होंगे
  • स्कूल आईडी कार्ड पर डिपो के साइन होते थे। | ऑनलाइन आवेदन और 40 रुपये पोर्टल फीस अनिवार्य
  • प्रक्रिया बेहद सरल और स्थानीय थी | लोकमित्र केंद्र के चक्कर काटने होंगे

चौतरफा विरोध और आक्रोश

इस फैसले को लेकर प्रदेशभर के अभिभावकों और छात्र संगठनों में रोष है। छात्र अभिभावक मंच के संयोजक का कहना है कि निगम के घाटे की भरपाई गरीब बच्चों की जेब से करना सरासर गलत है। उनका मानना है कि सरकार को अपने फिजूलखर्चों पर लगाम लगानी चाहिए और निगम को अलग से बजट देना चाहिए, ना कि छात्रों पर बोझ डालना चाहिए।

 

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ऑनलाइन और डिजिटल सेवा के नाम पर लागू की गई ये व्यवस्था पारदर्शी तो हो सकती है लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए ये 'शिक्षा के अधिकार' की राह में एक बड़ा रोड़ा साबित हो सकती है। 31 मार्च की समय सीमा नजदीक है, ऐसे में देखना होगा कि क्या सरकार जनहित में इस फैसले पर दोबारा विचार करती है या नहीं।

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