शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने लोहड़ी के त्योहर पर शिक्षकों को तगड़ा झटका दिया है। सुक्खू सरकार ने शिक्षकों के लिए ऐसी व्यवस्था की है- जिससे शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है।
सुक्खू सरकार की नई व्यवस्था
दरसअल, सुक्खू सरकार ने फंक्शनल इक्विवेलेंस मॉडल को लागू कर दिया है। ये फैसला तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में लिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में फैकल्टी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
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कहीं भी हो सकती है पोस्टिंग
नए मॉडल के तहत इन विषयों के शिक्षक राज्य के किसी भी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में अध्यापन कार्य कर सकेंगे। इसे न तो तबादला माना जाएगा और न ही प्रतिनियुक्ति। यह एक कार्यात्मक (Functional) व्यवस्था होगी- जिसे नियमों में शामिल कर दिया गया है। ऐसे में शिक्षक इससे इनकार नहीं कर पाएंगे।
शिक्षकों की कमी होगी पूरी
सरकार ने एप्लाइड साइंस और ह्यूमेनिटीज विषयों के सभी स्वीकृत पदों को एक साझा शैक्षणिक पूल के रूप में मानने का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य उन कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को पूरा करना है, जहां स्टाफ कम है, जबकि कुछ संस्थानों में इन्हीं विषयों में शिक्षक अतिरिक्त हैं और कक्षाएं सीमित हैं।
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पढ़ाना होगा 16 घंटे
शिक्षण कार्यभार का निर्धारण AICTI के नियमों के अनुसार किया जाएगा। नए प्रावधानों में शिक्षकों के पढ़ाने का समय निर्धारित किया गया है, जिसके अनुसार-
- सहायक प्रोफेसर को सप्ताह में न्यूनतम 16 घंटे
- एसोसिएट प्रोफेसर को सप्ताह में 14 घंटे
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निदेशालय करेगा सालाना तैनाती
तकनीकी शिक्षा निदेशालय हर शैक्षणिक वर्ष में छात्र संख्या और कॉलेज की आवश्यकता के आधार पर शिक्षकों की अस्थायी कार्यात्मक तैनाती करेगा। इसके लिए एक अकादमिक पूल रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिसमें शिक्षक की योग्यता, विशेषज्ञता, मूल कॉलेज और कार्यभार का पूरा विवरण दर्ज रहेगा।
वेतन पर नहीं पड़ेगा कोई असर
सरकार ने साफ किया है कि इस व्यवस्था से-
- शिक्षक के मूल पद, कैडर और वेतनमान पर कोई असर नहीं पड़ेगा
- वरिष्ठता और पदोन्नति प्रभावित नहीं होगी
- होस्ट कॉलेज में स्थायी नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं बनेगा
- अन्य कॉलेज में पढ़ाने पर शिक्षक को स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति पर नहीं माना जाएगा और टीए/डीए का भुगतान भी नहीं होगा। वेतन और सेवा रिकॉर्ड मूल संस्थान ही रखेगा।
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कैबिनेट से मंजूरी के बाद लागू
इस प्रस्ताव पर हाल ही में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विस्तृत चर्चा हुई थी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद तकनीकी शिक्षा विभाग ने इसे तुरंत प्रभाव से एप्लाइड साइंस व ह्यूमेनिटीज से जुड़े विषयों-भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, प्रबंधन और अंग्रेजी में कार्यरत सहायक व एसोसिएट प्रोफेसरों पर लागू कर दिया गया है।
