#उपलब्धि
January 13, 2026
हिमाचल : खेतों में पसीना बहा पिता ने खूब पढ़ाई बेटी, अब प्रोफेसर बन लाडली ने बढ़ाया मान
बबीता के लिए आसान नहीं था सफर
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शिमला। कहते हैं कि अगर हौसलों की उड़ान ऊंची हो- तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं। वर्तमान दौर में हिमाचल की बेटियां किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई हैं- बल्कि शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन और सामाजिक सेवा जैसे हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत का परचम लहरा रही हैं।
हिमाचल प्रदेश के छोटे-छोटे गांवों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना अब सिर्फ सपना नहीं रहा। शिमला के जुन्गा क्षेत्र की बबीता शर्मा की सफलता इसी बदलते समय की सशक्त मिसाल है।
बबीता शर्मा ने मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के बल पर केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद तक का सफर तय किया है। बबीता शर्मा का जन्म जुन्गा से सटी भड़ेच पंचायत के गांव टीर में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ।
सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके पिता रमेश चंद शर्मा खेती-बाड़ी से जुड़े हैं, जबकि माता विद्या देवी आंगनबाड़ी में सहायिका के रूप में सेवाएं दे रही हैं। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी बबीता ने बचपन से ही मेहनत और अनुशासन को अपनी ताकत बनाया।
बबीता शर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव भड़ेच के स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद दसवीं कक्षा उन्होंने कोटी से उत्तीर्ण की और बारहवीं की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लक्कड़ बाजार, शिमला से पूरी की। पढ़ाई के प्रति उनकी लगन शुरू से ही स्पष्ट थी, जिसका परिणाम आगे चलकर बड़े शैक्षणिक मुकाम के रूप में सामने आया।

उच्च शिक्षा के लिए बबीता ने राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला से बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से समाज कार्य विषय में मास्टर डिग्री हासिल की। समाज के लिए कुछ करने की भावना ने उन्हें इसी विषय में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2020 में उन्होंने यूजीसी नेट और जेआरएफ जैसी कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
बबीता शर्मा ने नवंबर 2025 में केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू में आयोजित साक्षात्कार में भाग लिया था। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने अपने ज्ञान, आत्मविश्वास और विषय पर पकड़ के बल पर सफलता हासिल की।
चयन के बाद उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर (समाज कार्य) के पद पर विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं भी ज्वाइन कर ली हैं। वर्तमान में वह समाज कार्य विषय में PHD कर रही हैं और दिसंबर 2025 में अपनी थीसिस भी जमा कर चुकी हैं।
बबीता शर्मा की इस उपलब्धि से पूरे जुन्गा क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। ग्रामीणों, शिक्षकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बबीता की सफलता क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा बनेगी। यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची, तो गांव की बेटियां भी देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंच सकती हैं।
अपनी सफलता पर बबीता शर्मा ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि आज का दौर प्रतिस्पर्धा से भरा हुआ है, लेकिन अगर लक्ष्य तय कर ईमानदारी और निरंतर प्रयास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। उन्होंने खासकर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों से आगे बढ़कर शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने का आह्वान किया।