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June 14, 2026
पशुपालकों को सुक्खू सरकार का झटका- अब नहीं खरीदा जाएगा 20 लीटर से ज्यादा दूध
इस फैसले से कई बड़े दूध उत्पादकों की बढ़ी चिंता
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के हजारों पशुपालकों को सुक्खू सरकार के नए फैसले से झटका लग सकता है। प्रदेश सरकार ने दूध खरीद व्यवस्था में बदलाव करते हुए तय किया है कि अब किसी भी पशुपालक से प्रतिदिन 20 लीटर से अधिक दूध नहीं खरीदा जाएगा।
सुक्खू सरकार का ये फैसला जहां कई बड़े दूध उत्पादकों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। वहीं, सरकार का मानना है कि इससे छोटे और सीमांत दुग्ध उत्पादकों को सहकारी व्यवस्था का अधिक लाभ मिलेगा।
आपको बता दें कि सुक्खू सरकार और हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दूध उत्पादक संघ (मिल्कफेड) ने फैसला लिया है कि अब प्रत्येक पंजीकृत पशुपालक से प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर दूध ही खरीदा जाएगा। इस कदम का उद्देश्य न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक छोटे और सीमांत पशुपालकों तक पहुंचाना है।
सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा दूध उत्पादकों को आकर्षक न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करवाने के बाद प्रदेश में डेयरी गतिविधियों के प्रति किसानों और पशुपालकों की रुचि लगातार बढ़ी है। इसका परिणाम यह रहा कि बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार सहकारी दुग्ध उत्पादन व्यवस्था से जुड़ रहे हैं और दूध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
विदित रहे कि, प्रदेश सरकार ने हाल के वर्षों में गाय और भैंस के दूध के समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि की है। गाय के दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य 32 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति किलो किया गया है। जबकि भैंस के दूध का मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया है।
दूध क्षेत्र में सरकार की नीतियों का असर आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। पिछले दो वर्षों के दौरान मिल्कफेड से जुड़े दूध उत्पादकों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। जहां पहले सहकारी व्यवस्था से जुड़े पशुपालकों की संख्या 28,645 थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 42,500 तक पहुंच गई है।
इसी तरह प्रदेश में प्रतिदिन दूध संग्रहण की मात्रा भी लगातार बढ़ी है। पहले जहां मिल्कफेड के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1.57 लाख लीटर दूध एकत्रित किया जाता था। वहीं, अब यह आंकड़ा बढ़कर 2.20 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि पशुपालकों का सहकारी दुग्ध प्रणाली पर भरोसा बढ़ा है और डेयरी क्षेत्र का दायरा लगातार विस्तारित हो रहा है।
सरकार का कहना है कि दूध खरीद पर प्रतिदिन 20 लीटर की अधिकतम सीमा तय करने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समर्थन मूल्य का लाभ कुछ चुनिंदा बड़े उत्पादकों तक सीमित न रह जाए। अगर दूध खरीद में संतुलन रखा जाएगा तो अधिक संख्या में छोटे पशुपालकों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा और सहकारी प्रणाली में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
इस व्यवस्था से नए दुग्ध उत्पादकों के पंजीकरण को भी प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही ऐसे ग्रामीण परिवार, जो अभी तक दूध विपणन प्रणाली से नहीं जुड़े थे, उन्हें भी आय का एक स्थायी स्रोत उपलब्ध हो सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह निर्णय केवल दूध खरीद व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पशुपालन से जुड़े परिवारों की आय बढ़ने से गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए डेयरी क्षेत्र आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
सरकार ने प्रदेश के सभी दूध उत्पादकों को भरोसा दिलाया है कि पशुपालकों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं। भविष्य में भी दूध उत्पादन, दुग्ध प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे- ताकि डेयरी क्षेत्र प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन सके।