शिमला। हिमाचल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले रामपुर के पूर्व विधायक नंदलाल आज पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे। चार बार रामपुर से विधायक रहे नंदलाल को उनके पैतृक गांव देवठी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। उनके अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू समेत प्रदेश के कई बड़े नेता शामिल होंगे। बेटे अभिषेक पिता को मुखाग्नि देंगे। 72 साल की उम्र में उनके निधन से रामपुर क्षेत्र में शोक की लहर है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी सुबह करीब 10 बजे देवठी पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके साथ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी सहित कई मंत्री, नेता और अधिकारी भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए है।
घर पर अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे रिश्तेदार
नंदलाल के निधन की खबर मिलते ही मंगलवार से ही उनके घर पर रिश्तेदारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पहुंचना शुरू हो गया था। आज उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होकर उन्हें अंतिम विदाई देंगे। अंतिम संस्कार के दौरान उनके बेटे अभिषेक उन्हें मुखाग्नि देंगे।
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चमियाना अस्पताल में ली आखिरी सांस
नंदलाल ने मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे शिमला के चमियाना स्थित अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में आखिरी सांस ली। वह 72 साल के थे और काफी समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर है। वह अपने पीछे पत्नी, बेटा, बहू और सात साल के पोते को छोड़ गए हैं।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भी निभाई ड्यूटी
राजनीति में आने से पहले नंदलाल ने देश की सुरक्षा के लिए कई साल तक सेवाएं दीं। उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में काम किया और कमांडो दस्ते का हिस्सा भी रहे। उन्हें जम्मू-कश्मीर में बटालियन की जिम्मेदारी संभालने का मौका भी मिला।
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उनके करियर में एक अहम जिम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) में रही। साल 1985 से 1997 तक उन्होंने प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा में सेवाएं दीं। इस दौरान एशियाई खेलों, गुटनिरपेक्ष सम्मेलन और राष्ट्रमंडल सम्मेलन जैसे बड़े आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था में भी उनकी भूमिका रही। उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।
2007 में नौकरी छोड़कर राजनीति में रखा कदम
करीब दो दशक तक सुरक्षा बलों में सेवाएं देने के बाद नंदलाल ने साल 2007 में ITBP से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली। इसके बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया और कांग्रेस के टिकट पर रामपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। अपने पहले ही चुनाव में जीत हासिल कर उन्होंने राजनीतिक सफर की शुरुआत की।
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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाते थे नंदलाल
नंदलाल को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता था। रामपुर में कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और संगठन को आगे बढ़ाने में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने लगातार चार बार विधानसभा चुनाव जीतकर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उनकी जीत यह दिखाती थी कि लोगों के बीच उनकी अच्छी पकड़ और लोकप्रियता थी।
CPS से सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष तक पहुंचे
विधायक बनने के बाद नंदलाल को सरकार और विधानसभा में कई अहम जिम्मेदारियां मिलीं। साल 2013 से 2017 तक उन्होंने मुख्य संसदीय सचिव (CPS) के रूप में काम किया। इसके बाद 2018 से 2022 तक वह विधानसभा की कल्याण और ग्रामीण नियोजन समितियों से जुड़े रहे।
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साल 2022 में चौथी बार विधायक बनने के बाद उन्हें विधानसभा की कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। मार्च 2024 में प्रदेश सरकार ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। इसके अलावा उन्हें लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट (LADA) कमेटी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
देवठी गांव में हुआ था जन्म, HPU से की थी MA
नंदलाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम प्यारे लाल था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU), शिमला से साल 1976 में राजनीति विज्ञान में एमए की पढ़ाई पूरी की थी। पढ़ाई के बाद वह सुरक्षा बलों में भर्ती हो गए और देश की सेवा में जुट गए। करीब तीन दशक तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।
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नंदलाल के निधन पर लवी मेले की गतिविधियां स्थगित
नंदलाल के निधन के चलते रामपुर में चल रहे अंतरराष्ट्रीय लवी मेले की 3 और 4 नवंबर की गतिविधियां स्थगित कर दी गई हैं। उनके अंतिम संस्कार में क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। उनके निधन से रामपुर की राजनीति और कांग्रेस संगठन को बड़ी क्षति पहुंची है।
