#विविध
August 28, 2025
मणिमहेश यात्रा: भरमौर में फंसे लोगों की पहली लिस्ट जारी, नेटवर्क अभी भी ठप; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
यात्रा मार्ग पर नाले में आई से फंसे गई भक्त, एनडीआरएफ रेस्क्यू में जुटी
शेयर करें:
चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण भारी तबाही देखने को मिली है। भारी बारिश का सबसे अधिक असर चंबा जिला की ऐतिहासिक मणिमहेश यात्रा पर पड़ा है। यहां यात्रा मार्ग पर नालों में आई बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है। जिससे हजारों श्रद्धालु मणिमहेश यात्रा के बीच में जगह जगह फंस गए थे। हालांकि एनडीआरएफ ने कई श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया है। वहीं प्रशासन ने भरमौर में मौजूद श्रद्धालुओं की एक लिस्ट भी जारी कर दी है।
बता दें कि चंबा जिले में भारी बारिश के बाद कई इलाकों में संचार सेवाएं ठप हैं, सड़कें टूट गई हैं, और बिजली.पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पूरी तरह से बाधित हो चुकी हैं। सबसे अधिक संकट मणिमहेश यात्रा के दौरान सामने आया है, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु खराब मौसम के चलते फंस गए थे। लगातार बारिश और लैंडस्लाइड के चलते प्रशासन ने मणिमहेश यात्रा को बीच में ही रोकने का फैसला लिया है। भरमौर, हड़सर और धन्छो के रास्तों पर हुए भूस्खलन और पुल बहने की घटनाओं के कारण यात्रा पूरी तरह से ठप हो चुकी है। हजारों शिवभक्त ट्रेक के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए थे, जिन्हें धीरे.धीरे रेस्क्यू किया जा रहा है।
एनडीआरएफ की 14वीं बटालियन की टीम ने चंबा के भरमौर क्षेत्र में धन्छो नामक स्थान से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। यहां एक पुल बह चुका था, जिस कारण रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध था। टीम ने अस्थायी फुटब्रिज और रस्सियों की मदद से एक वैकल्पिक मार्ग तैयार किया और पर्वतारोहण उपकरणों के सहारे यात्रियों को सुरक्षित निकाला। एनडीआरफ ने बताया कि कुल 3ए269 श्रद्धालुओं को सुरक्षित रूप से हड़सर (चंबा) की ओर निकाला गयाण् इनमें 1,730 पुरुष, 1,259 महिलाएं और 280 बच्चे शामिल थे। रेस्क्यू किए गए सभी यात्रियों को हड़सर चंबा की ओर सुरक्षित रूप से पहुंचा दिया गया है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : बेटे की आंखों के सामने मां ने तोड़ा दम, देह घर तक पहुंचाने को भटकना पड़ा रातभर
हिमाचल पुलिस ने भरमौर में फंसे 335 श्रद्धालुओं की सूची जारी की है। इन सभी लोगों के बारे में बताया गया है कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। संचार सेवाएं बाधित होने के कारण उनके परिजन उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
प्रशासन ने जारी की पहली लिस्ट, देखने के लिए यहां क्लिक करें.........https://shorturl.at/ZwLOp
हालांकि मणिमहेश यात्रा मार्ग पर फंसे श्रद्धालुओं को एनडीआरएफ की टीम रेस्क्यू कर रही है। इन श्रद्धालुओं को हड़सर और भरमौर में पहुंचाया जा रहा है। लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी है कि इन लोगों को चंबा कैसे पहुंचाया जाएगा। क्योंकि चंबा से लेकर भरमौर तक की सड़क कई जगहों से टूट चुकी है। कई स्थानों पर तो पूरी की पूरी सड़क ही रावी में समा गई है या फिर पूरा पहाड़ ही सड़क पर आ गया है। ऐसे में इस सड़क को बहाल करने में ही कई दिन लग जाएंगे।
आज हडसर से चंबा पहुंचे दो श्रद्धालुओं ने रास्ते की स्थित को बयां करते हुए बताया कि वह लगभग 85 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर चंबा पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि रास्ते में कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। जिसकी बहाली के लिए अभी तक किसी तरह का कार्य शुरू नहीं हुआ है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने उन्हें खाने पीने का सामान दिया। जिसकी बदौलत ही वह 85 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर पाए।
24 अगस्त के बाद से चंबा जिला पूरी तरह से संचार व्यवस्था से कट गया है। मोबाइल नेटवर्क, बिजली और पानी की सुविधाएं पूरी तरह से बाधित हैं। हालांकि, कुछ इलाकों जैसे साहू में एयरटेल का सिग्नल अस्थायी रूप से बहाल हुआ है, लेकिन यह लगातार आ.जा रहा है।
चंबा सदर के विधायक नीरज नैय्यर ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि पठानकोट.चंबा मुख्य मार्ग को बहाल कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि केवल आवश्यक कार्य होने पर ही इस मार्ग का प्रयोग करें, क्योंकि भारी वाहनों और यात्रियों के कारण जाम की स्थिति बन सकती है।
भरमौर क्षेत्र के सलून गांव में भूमि कटाव की गंभीर घटना सामने आई है, जहां रावी नदी के किनारे स्थित लगभग 9 मकान नदी में समा गए। गांव को खतरे की स्थिति में घोषित कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने बताया कि पूरा गांव अब खत्म होने की कगार पर है।
चंबा के उपायुक्त मुकेश रेपस्वाल ने जनता से अपील की है कि जब तक मौसम सामान्य नहीं होता और रास्ते पूरी तरह से बहाल नहीं हो जातेए तब तक लोग मणिमहेश यात्रा पर न जाएं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और रेस्क्यू अभियान जारी है। चंबा जिला इन दिनों भयंकर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। प्रशासनए एनडीआरएफ और पुलिस की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। हालांकि, मौसम की मार और बुनियादी सुविधाओं की बाधा इस चुनौती को और भी कठिन बना रही है।