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July 31, 2025
हिमाचल का जवान हुआ शहीद: डेढ़ साल का है बेटा; एक माह पहले बने थे लेफ्टिनेंट कर्नल
प्रमोशन की खुशियां मातम में बदली, लद्दाख में गश्त के दौरान वाहन पर गिरी थी चट्टानें
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश ने आज अपना एक होनहार जवान खो दिया। बुधवार की सुबह भारतीय सेना और हिमाचल प्रदेश के लिए एक ऐसा काला दिन बन गई, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। लद्दाख की गलवान घाटी के चारबाग इलाके में हुए एक दर्दनाक हादसे में हिमाचल के युवा सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह मनकोटिया शहीद हो गए। उनके साथ ही पंजाब के गुरदासपुर निवासी लांस दफादार दलजीत सिंह ने भी देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
हिमाचल के कांगड़ा जिला के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह मनकोटिया मात्र 33 साल की उम्र में ही देश पर शहीद हो गए। बड़ी बात यह है कि अभी एक माह पहले जून महीने में ही वह प्रमोट हुए थे और लेफ्टिनेंट कर्नल बने थे। लेकिन प्रमोशन की यह खुशियां मात्र एक माह में ही मातम में बदल गई। लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह मनकोटिया एक डेढ़ साल के बेटे के पिता थे।
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बता दंे कि आज बुधवार सुबह क़रीब 11: 30 बजे लद्दाख में सेना का एक वाहन दल फायरिंग रेंज की ओर जा रहा था, तभी अचानक पहाड़ से भारी भूस्खलन हुआ और विशाल चट्टानें सैन्य वाहन पर आ गिरीं। यह हमला इतना तीव्र था कि वाहन में सवार लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह और लांस दफादार दलजीत सिंह की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह हादसा सेना और राष्ट्र दोनों के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
33 वर्षीय लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह मनकोटिया महज कुछ सप्ताह पहले ही जून 2025 में पदोन्नत होकर लेफ्टिनेंट कर्नल बने थे। परिवार और दोस्तों में इस बड़ी उपलब्धि को लेकर गर्व और उत्साह था, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि इतनी जल्दी यह खुशी मातम में बदल जाएगी। जिस घर में पदोन्नति की मिठाइयां बांटी गई थीं, वहां अब हर कोने में सन्नाटा पसरा है। घर की दीवारें अब बेटे, पति और पिता के चले जाने के गम में गूंज रही हैं।
भानु प्रताप सिंह हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी थे। वर्तमान में वे पठानकोट के अबरोल नगर में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। उनकी पत्नी तारिणी, माता सुनीता मनकोटिया और पिता रिटायर्ड कर्नल आरपीएस मनकोटिया इस आघात से टूट चुके हैं। उनका डेढ़ साल का इकलौता बेटा व्योम, जिसे उन्होंने गोद में खिलाया, अब पिता की एक धुंधली याद बनकर रह गया है।
भानु प्रताप ने अपनी प्रारंभिक सैन्य शिक्षा प्रतिष्ठित इंडियन मिलिट्री अकादमी देहरादून से प्राप्त की थी, जहां उन्हें उनकी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता के लिए स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और गोल्ड मेडल जैसे सर्वोच्च सम्मान मिले थे। यह पुरस्कार उन चुनिंदा कैडेट्स को दिए जाते हैं जो प्रशिक्षण के हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भानु प्रताप सिंह न केवल एक होनहार सैनिक थे, बल्कि देश के भविष्य के लिए एक आशा की किरण थे।
गुरुवार को पठानकोट में जालंधर बाईपास के पास स्थित चक्की पुल श्मशान घाट पर लेफ्टिनेंट कर्नल भानु प्रताप सिंह को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा घर पहुंचा, पूरे मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। भारत माता की जय और भानु प्रताप अमर रहें के नारों के बीच लोग अपने वीर जवान को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
हादसे की जानकारी मिलते ही हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने लिखाए हिमाचल ने अपना वीर सपूत खोया है। देश इन वीरों का सदा ऋणी रहेगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा ईश्वर शहीदों की आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवारों को यह असीम दुःख सहने की शक्ति दें।