शिमला। हर साल 26 जुलाई को करगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह केवल एक सैन्य जीत नहीं, बल्कि भारत माता के उन वीर सपूतों की गौरवगाथा है जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान देकर तिरंगे को शान से लहराया। इस युद्ध में हिमाचल प्रदेश की वीरभूमि ने 52 बेटों को खोया, जिन्होंने अपने पराक्रम से दुश्मन को करारी शिकस्त दी।
'ये दिल मांगे मोर’ का शौर्य
जिला कांगड़ा के पालमपुर के रहने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा, करगिल युद्ध के अमर नायक बने। पॉइंट 5140 और 4875 की कठिन चोटियों पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए उन्होंने वीरगति पाई और परमवीर चक्र से सम्मानित हुए। उनका नारा "ये दिल मांगे मोर" आज भी भारतवासियों को जोश से भर देता है।
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अकेले लड़े पूरी चौकी से
बिलासपुर के बकैण गांव के संजय कुमार ने पॉइंट 4875 पर अकेले पाकिस्तानी सैनिकों की मशीनगन चौकी ध्वस्त की। निहत्थे होकर भी उन्होंने जबरदस्त साहस दिखाया और परमवीर चक्र के पात्र बने। उनका अदम्य साहस भारतीय सेना की शौर्यगाथा में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है।
हर जिले का सपूत बना वीरगाथा
करगिल युद्ध में हिमाचल के कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, बिलासपुर, शिमला, सोलन, ऊना, सिरमौर, कुल्लू, और चंबा जैसे लगभग हर जिले के जवान शामिल रहे। कोई ग्रेनेडियर बना तो कोई लांसनायक, किसी ने आखिरी गोली तक लड़ा तो किसी ने अंतिम सांस तक तिरंगे को थामा।
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युद्ध के पहले बलिदानी
शिमला के यशवंत सिंह करगिल युद्ध के पहले बलिदानी थे। उनके नाम पर आत्मा रंजन की प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां इस बलिदान को भावनात्मक ऊंचाई देती हैं- "अब समझा कि साहूकार के फाट भर इधर आने पर क्यों उठती थी बूढ़ी ईजी दराट लेकर"। ये पंक्तियां भारत माता की रक्षा के लिए हर आम नागरिक की सजगता को दर्शाती हैं।
हिमाचल की मिट्टी में बसी वीरता
हिमाचल प्रदेश का हर गांव, हर घाटी करगिल के शूरवीरों की कहानियां समेटे हुए है। युवाओं को प्रेरणा देने वाली ये गाथाएं सिर्फ इतिहास नहीं, एक जीवंत भावना हैं जो हर साल करगिल विजय दिवस पर फिर से जीवंत होती हैं।
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राष्ट्र का नमन
करगिल विजय दिवस पर हिमाचल के 52 वीरों को कृतज्ञ राष्ट्र बारंबार नमन करता है। यह दिन सिर्फ स्मरण का नहीं, संकल्प का है—कि हम उन बलिदानों को कभी न भूलें, और नई पीढ़ी को शौर्य, समर्पण और देशप्रेम की शिक्षा दें।
52 वीर जवानों के नाम
शिमला से-
- ग्रेनेडियर यशवंत सिंह
- ग्रेनेडियर नरेश कुमार
- ग्रेनेडियर अनंत राम
- राइफलमैन श्याम सिंह
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कांगड़ा से-
- कैप्टन विक्रम बत्रा, परमवीर चक्र
- कैप्टन सौरभ कालिया
- ग्रेनेडियर विजेंद्र सिंह
- ग्रेनेडियर सुरजीत सिंह
- ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह
- रायफलमैन राकेश कुमार
- रायफलमैन अशोक कुमार
- रायफलमैन सुनील कुमार
- रायफलमैन जगजीत सिंह
- सिपाही लखबीर सिंह
- सिपाही संतोष सिंह
- नायक ब्रह्मदास
- लांस नायक वीर सिंह
- लांसनायक पदम सिंह
- हवलदार सुरेंद्र सिंह
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मंडी से
- कैप्टन दीपक गुलेरिया
- ग्रेनेडियर पूर्ण चंद
- नायब सूबेदार खेम चंद राणा
- हवलदार कृष्ण चंद
- नायक स्वर्ण कुमार
- सिपाही टेक सिंह
- सिपाही राजेश कुमार चौहान
- सिपाही नरेश कुमार
- सिपाही हीरा सिंह
- नायक मेहर सिंह
- लांस नायक अशोक कुमार
हमीरपुर से
- हवलदार कश्मीर सिंह
- हवलदार राजकुमार
- हवलदार स्वामीदास चंदेल
- सिपाही राकेश कुमार
- सिपाही सुनील कुमार
- रायफलमैन प्रवीण कुमार
- रायफलमैन दीपचंद
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बिलासपुर से-
- हवलदार उधम सिंह
- हवलदार राजकुमार
- हवलदार प्यार सिंह
- नायक अश्विनी कुमार
- नायक मस्त राम
- नायक मंगल सिंह
- राइफलमैन विजय पाल
ऊना से-
- कैप्टन अमोल कालिया
- राइफलमैन मनोहर लाल
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सोलन से-
- सिपाही धर्मेंद्र सिंह
- राइफलमैन प्रदीप कुमार
सिरमौर से-
- राइफलमैन कुलविंद्र सिंह
- राइफलमैन कल्याण सिंह
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चंबा से-
- सिपाही खेम राज
कुल्लू से-
- हवलदार डोला राम
