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June 14, 2026

हिमाचल की हसीन वादियों का दीदार हुआ महंगा ! इस घाटी में वसूली जाएगी 1000 रुपए 'ईको टूरिज्म' फीस

पर्यटकों पर लगेगा ईको पर्यटन शुल्क सुक्खू सरकार लेगी अंतिम निर्णय

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eco tourism fees

शिमला/किन्नौर। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत और शांत वादियों का दीदार करने की चाह रखने वाले सैलानियों के लिए एक बड़ी खबर है। अगर आप आने वाले दिनों में किन्नौर जिले की विश्व प्रसिद्ध सांगला घाटी की ओर रुख करने का प्लान बना रहे हैं, तो अब आपको प्रकृति के इन नजारों के लिए थोड़ी ज्यादा कीमत चुकानी होगी। दरअसल, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को व्यवस्थित करने के लिए सरकार एक नया कदम उठाने जा रही है, जिसके तहत पर्यटकों को अब अपनी जेब और ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।

एक हजार रुपए वसूला जाएगा ईको टूरिज्म शुल्क

सांगला घाटी के बेहद खूबसूरत और संवेदनशील रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य (Rakchham-Chhitkul Wildlife Sanctuary) क्षेत्र में आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों से अब 'ईको पर्यटन शुल्क' वसूला जाएगा। वन विभाग ने इस अभयारण्य क्षेत्र में प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए प्रति गाड़ी ₹1,000 का ईको टूरिज्म शुल्क तय करने का प्रस्ताव तैयार किया है। हालांकि अंतिम दरों को सरकार के साथ विस्तृत चर्चा के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

 

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यहां लगेंगे एंट्री बैरियर, सुरक्षा घेरे में होंगी वादियां

वन विभाग और ईको टूरिज्म सोसायटी की ओर से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए रकछम, छितकुल और बटसेरी में प्रवेश बैरियर स्थापित करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। इन बैरियरों के माध्यम से क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और वाहनों का रिकॉर्ड रखा जाएगा तथा निर्धारित शुल्क एकत्र किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों पर नजर रखने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देने में मदद मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण और सुविधाओं पर खर्च होगी राशि

ईको पर्यटन शुल्क से मिलने वाली आय को सीधे क्षेत्र के विकास कार्यों में लगाया जाएगा। इस राशि का उपयोग स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने, पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने, वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं पर किया जाएगा। इसके अलावा पर्यटन के बढ़ते दबाव के बीच संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए भी इस फंड का उपयोग किया जाएगा।

 

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देशभर के लिए आदर्श पर्यटन मॉडल बनाने की तैयारी

हाल ही में रकछम में आयोजित ईको टूरिज्म सोसायटी की कार्यकारी समिति की पहली बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों, युवक मंडलों, महिला मंडलों, बुद्धिजीवियों और वन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि सांगला घाटी को केवल पर्यटन केंद्र के रूप में नहीं बल्कि एक सतत और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी हो और स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ भी मिल सके।

 

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दुर्लभ जैव विविधता की सुरक्षा पर फोकस

वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र अपनी अनूठी जैव विविधता, दुर्लभ वन्यजीवों, बर्फ से ढकी चोटियों, हरे-भरे जंगलों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। हर वर्ष हजारों देशी और विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या के कारण पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में पर्यटन को नियंत्रित और जिम्मेदार तरीके से संचालित करना समय की आवश्यकता बन गया है।

स्थानीय लोगों ने भी किया समर्थन

बैठक में शामिल पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया। उनका कहना है कि यदि शुल्क से प्राप्त राशि का उपयोग क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण में किया जाता है तो इससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा होगा। 

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सुक्खू सरकार लेगी अंतिम निर्णय

अब सभी की नजर सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है तो हिमाचल के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल छितकुल और रकछम की यात्रा करने वाले पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए अतिरिक्त शुल्क अदा करना होगा।

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