#विविध
June 12, 2026
आपदा से पहले हिमाचल तैयार...75 हजार रक्षक गांव-गांव में होंगे तैनात, संकट की घड़ी में मिलेगी मदद
आपदा रक्षकों को SDRF की टीमें देंगी विशेष प्ररिक्षण
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के गांवों में जब बादल फटते हैं, पहाड़ दरकते हैं या अचानक बाढ़ आती है- तब सबसे बड़ी चुनौती राहत दलों के पहुंचने तक की होती है। कई बार यही शुरुआती घंटे जिंदगी और मौत के बीच का फर्क तय करते हैं।
अब हिमाचल सरकार इसी समय को बचाने के लिए गांव-गांव में ऐसे लोगों की फौज तैयार कर रही है। जो आपदा आने के कुछ ही मिनटों में राहत और बचाव की कमान संभाल सकेंगे।
प्राकृतिक आपदाओं से लगातार जूझ रहे हिमाचल प्रदेश में अब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित आपदा रक्षकों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने शुरुआती चरण में पांच हजार आपदा रक्षक तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसे आगे बढ़ाकर 75 हजार तक पहुंचाया जाएगा।
इनका उद्देश्य किसी भी आपदा के तुरंत बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू करना होगा- ताकि सरकारी एजेंसियों के पहुंचने से पहले प्रभावित लोगों को सहायता मिल सके।
राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल SDRF की विशेषज्ञ टीमें एक महीने में 1500 से 2000 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेंगी। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं, युवक मंडलों, महिला मंडलों और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को चुना जाएगा। प्रशिक्षण संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम UNDP के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
चयनित स्वयंसेवकों को तीन-तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें प्राथमिक उपचार, रस्सी के जरिए बचाव तकनीक, खोज एवं राहत कार्य, जोखिम प्रबंधन, संचार व्यवस्था और आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
बादल फटना, भूस्खलन, बाढ़ और सड़क दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं के दौरान शुरुआती घंटों में स्थानीय लोगों की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। प्रशिक्षित आपदा रक्षक प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, प्राथमिक उपचार देने और बचाव एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने में मदद करेंगे।
सरकार का लक्ष्य संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्रों तक आपदा रक्षकों का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में स्थानीय स्तर पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। इससे जनहानि और संपत्ति के नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से भारी नुकसान हुआ है। इसी को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन की रेडी परियोजना के तहत आपदा से पहले तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है। आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ अब मानव संसाधन को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।
विशेष सचिव एवं निदेशक आपदा प्रबंधन पुष्पेंद्र राणा के अनुसार, एक महीने में 1500 से 2000 आपदा रक्षकों को प्रशिक्षित करने की योजना है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में प्रभावित लोगों को तुरंत राहत उपलब्ध कराई जा सके।