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June 13, 2026
हिमाचल: पत्नी के हवाले दो मासूम बेटों को छोड़ गया 38 वर्षीय खनन रक्षक, ड्यूटी पर बिगड़ी थी तबीयत
बूढ़े मां बाप पत्नी का सहारा था कुलदीप, पूरे गांव में पसरा मातम
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नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां नियति ने एक हंसते-खेलते परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। कफोटा उपमंडल के बड़वास गांव के रहने वाले और क्षेत्र के एक बेहद ईमानदार व जांबाज खनन रक्षक (माइनिंग गार्ड) कुलदीप चौहान (38) का अचानक निधन हो गया।
महज 38 साल की उम्र में यह कर्मवीर अपने दो मासूम बच्चों और पत्नी को इस दुनिया में तन्हा छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए रुखसत हो गया। इस असमय और दर्दनाक घटना ने न सिर्फ एक परिवार को पूरी तरह तोड़कर बिखेर दिया है, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे और आंसुओं में डुबो दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार रमेश चौहान के बेटे कुलदीप चौहान ड्यूटी पर तैनात थे, जब अचानक उन्हें पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। दर्द असहनीय होने पर परिजन उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए नाहन अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद भी जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और स्थिति गंभीर होने लगी, तो डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया।
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पीजीआई में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी जान बचाने की जद्दोजहद में जुटी रही। हर मुमकिन कोशिश की गई, दवाइयों से लेकर दुआओं का दौर चला, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। जिंदगी और मौत के बीच चले इस कड़े मुकाबले में आखिरकार कुलदीप जिंदगी की जंग हार गए और उनकी सांसों की डोर टूट गई।
कुलदीप की शादी वर्ष 2020 में बड़े अरमानों के साथ हुई थी। अभी तो गृहस्थी के सुनहरे सपने ठीक से परवान भी नहीं चढ़े थे कि महज छह वर्षों के छोटे से सफर में हमसफर का साथ हमेशा के लिए छूट गया। कुलदीप अपने पीछे बूढ़े माता-पिता, रोती-बिलखती पत्नी और दो मासूम बेटों को छोड़ गए हैं।
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उन मासूम बच्चों की उम्र अभी इतनी छोटी है कि शायद उन्हें यह भी नहीं पता कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। वे अपनी मां की भीगी आंखें और घर में पसरे मातम को फटी-फटी आंखों से देख रहे हैं। इन दो मासूमों के सिर से इतनी कम उम्र में पिता का साया उठ जाएगा, इस भयावह हकीकत की कल्पना मात्र से ही बड़वास गांव का हर शख्स स्तब्ध और निशब्द है।
कुलदीप चौहान सिर्फ माइनिंग विभाग के एक अदने से कर्मचारी नहीं थे, बल्कि वे अपने गांव बड़वास की धड़कन और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। वे स्वभाव से बेहद मेहनती, मिलनसार और हर किसी के सुख-दुख में आधी रात को भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले इंसान थे। गांव का कोई भी गरीब या जरूरतमंद हो, कुलदीप उसकी मदद करने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते थे।
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आज जब उनके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने की खबर आई, तो हर वह आंख रो पड़ी, जिसने कुलदीप को कभी मुस्कुराते हुए देखा था। उनके चेहरे पर हमेशा रहने वाली वह बेबाक मुस्कान और मददगार रवैया अब सिर्फ लोगों की यादों और उनके दिलों में जिंदा रहेगा।
इस मनहूस खबर के बाद से पूरे बड़वास गांव और कफोटा क्षेत्र में शोक की लहर है। कुलदीप की ईमानदारी और उनकी इंसानियत को याद कर हर कोई फूट-फूट कर रो रहा है। आज गांव के कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कुलदीप का इस तरह चले जाना समाज के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। हर कोई ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहा है कि इस अभागे परिवार और उन मासूम बच्चों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति दे।