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June 12, 2026
हिमाचल में गाय के पेट से निकला 7 किलो प्लास्टिक, दो पत्थर और तीन सिक्के- कई घंटे चली सर्जरी
प्लास्टिक खाने से पशुओं की बढ़ रही परेशानी
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ऊना। डॉक्टरों को अक्सर भगवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि उनकी कोशिशें कई बार जिंदगी बचाने का काम करती हैं। ऐसा ही एक मानवीय उदाहरण जिला ऊना से सामने आया है, जहां पशु चिकित्सकों ने अपनी कुशलता और मेहनत से एक गाय को नया जीवन दिया। डॉक्टरों को गाय के पेट से जो मिला है उसने सभी को चौंका दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला जिला ऊना के सोहारी गांव से सामने आया है। यहां पशुपालक मदन लाल की गाय पिछले रविवार से खाना नहीं खा रही थी। वह लगातार बेचैनी और तनाव की स्थिति में थी। गाय की हालत बिगड़ती देख परिवार उसे इलाज के लिए ललड़ी पशु चिकित्सालय लेकर पहुंचा।
डॉक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि गाय के पेट में कुछ बाहरी वस्तुएं जमा हो गई हैं, जिसकी वजह से उसकी तबीयत खराब हो रही है। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला लिया।
गाय के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने गाय के पेट से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, दो पत्थर और तीन सिक्के बाहर निकाले। डॉ. ने बताया कि पेट में लंबे समय से जमा यह सामग्री गाय के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थी। अगर समय पर इलाज नहीं मिलता तो उसकी जान भी जा सकती थी।
डॉक्टरों ने बताया कि खुले में पड़ा प्लास्टिक अक्सर गाय और अन्य पशु खा लेते हैं। यह प्लास्टिक उनके पेट में जमा होकर कई तरह की बीमारियों को जन्म देता है। पशु चिकित्सा विभाग ने लोगों से अपील की है कि घरों और आसपास के क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा खुले में न फेंकें। सही तरीके से कचरे का निपटान करके पशुओं को इस तरह के खतरे से बचाया जा सकता है।
गाय के मालिक मदन लाल ने पशु चिकित्सा विभाग और पूरी डॉक्टर टीम का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनकी गाय की हालत काफी खराब थी, लेकिन ललड़ी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने समय पर इलाज कर उसे नया जीवन दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध होने से अब पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए दूर-दराज के बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ता।
बहुआयामी पशु चिकित्सालय एवं पॉलीक्लीनिक ललड़ी अब ऊना जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के पशुपालकों के लिए भी भरोसे का केंद्र बन चुका है। यहां पशुओं के लिए आधुनिक जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अल्ट्रासाउंड, सर्जरी, हड्डियों से जुड़े इलाज, आंखों के ऑपरेशन और कई अन्य सुविधाओं के कारण यह अस्पताल लगातार अपनी पहचान बना रहा है।
अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की वजह से पशुओं की बीमारियों की पहचान और इलाज पहले से काफी आसान हो गया है। पहले गंभीर मामलों में पशुपालकों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब कई बड़ी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल रही हैं। इससे पशुपालकों का समय और खर्च दोनों बच रहे हैं।