कुल्लू। जिला कुल्लू की मनाली विधानसभा के बाड़ी स्कूल में 18 अगस्त को खीर खाने के बाद 38 बच्चों की तबीयत खराब होने के मामले में नया अपडेट सामने आया है। स्कूल की रसोई से लिए गए चीनी के सैंपल की लैब जांच रिपोर्ट सही नहीं पाई गई है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि बच्चों के बीमार होने की असली वजह चीनी ही थी या इसके पीछे कोई और कारण था।
चीनी का सैंपल जांच में फेल
बच्चों के बीमार होने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने स्कूल की रसोई से खीर बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीनी, पानी और दूसरी खाद्य चीजों के सैंपल लिए थे। सभी सैंपल जांच के लिए कंडाघाट की लैब भेजे गए थे। बुधवार, 2 सितंबर को प्रशासन को इसकी रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट के मुताबिक पानी और बाकी खाद्य चीजों के सैंपल सही पाए गए हैं, लेकिन चीनी का सैंपल गुणवत्ता की जांच में फेल हो गया है।
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अभी भी साफ नहीं, चीनी से ही बीमार हुए बच्चे या वजह कुछ और
चीनी का सैंपल फेल होने के बावजूद प्रशासन अभी यह नहीं कह रहा है कि बच्चों की तबीयत खराब होने की मुख्य वजह चीनी ही थी। जांच के दौरान मिड-डे मील कर्मचारी के बयान भी लिए गए थे। कर्मचारी ने बताया था कि जिस दिन बच्चे बीमार हुए, उस दिन खीर बनाने में यह चीनी इस्तेमाल ही नहीं की गई थी। ऐसे में जांच कमेटी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर बच्चों की तबीयत खराब होने की असली वजह क्या थी।
SDM ने कहा- रिपोर्ट को किया जा रहा कंपाइल
मामले की जांच कर रहे मनाली के SDM गुंजीत चिम्मा ने बताया कि चीनी के सैंपल की रिपोर्ट गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरी है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और अब जांच रिपोर्ट के साथ खाद्य पदार्थों की लैब रिपोर्ट को एक साथ तैयार किया जा रहा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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खीर खाने के बाद 38 बच्चों की बिगड़ी थी तबीयत
गौरतलब है कि 18 अगस्त को बाड़ी स्कूल में खीर खाने के बाद एक साथ 38 बच्चों की तबीयत खराब हो गई थी। बच्चों को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया था। हालांकि अब सभी बच्चे स्वस्थ हैं और ज्यादातर बच्चे अपने घर लौट चुके हैं।
तीन शिक्षकों को स्कूल से हटाया गया
मामले के बाद विभाग ने स्कूल के मुख्य अध्यापक समेत तीन शिक्षकों को स्कूल से हटाकर क्लस्टर भेज दिया था। अभिभावक भी स्कूल के स्टाफ को बदलने की मांग कर रहे थे। इसके बाद अब धीरे-धीरे बच्चे स्कूल पहुंचने लगे हैं।
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स्थानीय निवासी देवेंद्र सोनी के अनुसार बुधवार को 10 से ज्यादा बच्चे स्कूल पहुंचे। वहीं, जांच कमेटी यह भी पता कर रही है कि बच्चों की तबीयत खराब होने में चीनी की कोई भूमिका थी या फिर कोई दूसरा कारण था।
स्कूल में खाद्य सामग्री कहां से आई, इसकी भी जांच
जांच के दौरान इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि स्कूल में इस्तेमाल होने वाली चीनी और दूसरी खाद्य सामग्री आखिर कहां से खरीदी गई थी। प्रशासन मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहा है।
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मिड-डे मील वर्कर और SMC अध्यक्ष के बयान दर्ज
इस मामले में एसडीएम मनाली ने स्कूल में तैनात मिड-डे मील वर्कर को बुलाकर उसके बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन समिति यानी SMC अध्यक्ष के भी बयान लिए गए हैं। अब इन बयानों और लैब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों का सवाल- जिम्मेदार लोगों पर कब होगी कार्रवाई?
बच्चों के बीमार होने की घटना के बाद अभिभावकों में काफी चिंता है। उनका कहना है कि बच्चों की सेहत के साथ लापरवाही हुई है, इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अब अभिभावकों को प्रशासन की अंतिम जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का इंतजार है।
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घटना के बाद स्कूल से नाम कटवाने पहुंच गए थे अभिभावक
बच्चों के बीमार होने की घटना के बाद अभिभावक इतने चिंतित थे कि 1 सितंबर को बड़ी संख्या में वे अपने बच्चों का नाम स्कूल से कटवाने और स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट लेने पहुंच गए थे। उस समय स्कूल में बच्चों की संख्या भी बेहद कम हो गई थी। हालांकि, अब प्रशासन की जांच आगे बढ़ रही है और बच्चों के बीमार होने की असली वजह सामने आने का इंतजार है।
