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September 1, 2026

हिमाचल में पेंशनरों का फूटा गुस्सा: बोले-'हक मांग रहे-भीख नहीं'; सुक्खू सरकार को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

लंबित देनदारियों को लेकर पेंशनरों ने सुक्खू सरकार के खिलाफ बोला हल्ला

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pensionar protest Himachal

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंगलवार को सियासत के दो मोर्चे एक साथ गर्म नजर आए। एक तरफ राजधानी शिमला में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान संस्थानों को बंद, विलय और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होती रही, तो दूसरी तरफ विधानसभा से कुछ दूरी पर चौड़ा मैदान में प्रदेशभर से जुटे करीब 1.90 लाख पेंशनरों के प्रतिनिधित्व वाले आंदोलन ने सुक्खू सरकार की मुश्किलें बढ़ा दीं। पेंशनरों ने अपनी लंबित वित्तीय देनदारियों, एरियर और महंगाई भत्ते की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

 

सुबह से ही चौड़ा मैदान में पेंशनरों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा प्रदेश की सेवा में लगा दिया, लेकिन अब अपने ही हक के पैसे के लिए उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

 

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एरियर और डीए को लेकर सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

चौड़ा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय आक्रोश रैली में पेंशनरों ने लंबित डीए/डीआर एरियर, संशोधित वेतनमान के बकाये और चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों का जल्द भुगतान करने की मांग की।  पेंशनर नेताओं ने 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए 40 प्रतिशत लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी से संबंधित अधिसूचना जारी करने की भी मांग उठाई।

 

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इसके अलावा 166 माह के पे एरियर और पेंशन एरियर तथा 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते का लाभ देने की मांग भी प्रमुख रही। पेंशनरों का आरोप है कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण अब उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

31 जुलाई तक अधिसूचना के आश्वासन का मुद्दा

पेंशनर नेताओं ने कहा कि 13 मई को सचिवालय में सरकार के साथ हुई बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा हुई थी। उनका दावा है कि उस दौरान 31 जुलाई तक संबंधित मांगों को लेकर अधिसूचना जारी करने का आश्वासन दिया गया था। पेंशनर नेताओं के अनुसार निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जब उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो उनके बीच नाराजगी और बढ़ गई। इसी के बाद मंगलवार को शिमला में राज्यस्तरीय आक्रोश रैली का आयोजन किया गया।

 

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'हम अपना हक मांग रहे हैं, भीख नहीं'

पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने अपनी जवानी हिमाचल के निर्माण और सरकारी सेवा में लगा दी, उन्हें आज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशनर अपना हक मांगने आए हैं, किसी से भीख मांगने नहीं। उन्होंने सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पेंशनरों की लंबित देनदारियों को लेकर अब आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

करीब 7 हजार करोड़ रुपये की देनदारी का दावा

पेंशनर नेताओं ने दावा किया कि प्रदेश में करीब 1.90 लाख से अधिक पेंशनर हैं। उनके अनुसार पेंशनरों की कुल लंबित देनदारी पहले करीब 12 हजार करोड़ रुपये के आसपास थी, जिसमें से लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके बाद भी करीब 7 हजार करोड़ रुपये की देनदारी बाकी होने का दावा किया गया। पेंशनर नेताओं ने सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब सरकार अन्य मदों में खर्च कर रही है तो लंबे समय से अपने हक के भुगतान का इंतजार कर रहे बुजुर्गों की देनदारियों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही।

 

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पुलिस से भी हुई बहस, ट्रैफिक डायवर्ट

चौड़ा मैदान में बड़ी संख्या में पेंशनरों के जुटने के कारण आसपास के क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। प्रदर्शनकारियों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही को लेकर पुलिस और पेंशनरों के बीच बहस भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यातायात पुलिस को चौड़ा मैदान की ओर जाने वाले कुछ मार्गों से ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। बालूगंज चौक तथा रेलवे स्टेशन-कैनेडी चौक से चौड़ा मैदान की ओर जाने वाले यातायात में बदलाव किया गया। इससे शहर के कुछ हिस्सों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

 

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सरकार को साफ चेतावनी- मांगें नहीं मानी तो आंदोलन होगा उग्र

पेंशनर नेताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि लंबित वित्तीय देनदारियों और अन्य मांगों पर जल्द ठोस फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

समिति के महासचिव भूप राम वर्मा सहित अन्य नेताओं ने कहा कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा। नेताओं ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के घेराव जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

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